(Bank New Rules/ Image Credit: ANI News)
नई दिल्ली: Bank New Rules 2026 देश के बैंकों में ऐसे पैसे की रकम तेजी से बढ़ रही है जिन्हें सालों से कोई क्लेम नहीं कर रहा। इन्हें अनक्लेम्ड डिपॉजिट कहा जाता है। वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया कि 31 मार्च 2024 तक बैंकों में इन पैसों की कुल राशि लगभग 60,610 करोड़ रुपये थी, जो 31 मार्च 2025 तक बढ़कर 74,580 करोड़ रुपये हो गई। यानी सिर्फ एक साल में हजारों करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
सरकार के अनुसार, यदि कोई सेविंग या करंट अकाउंट 10 साल तक निष्क्रिय रहता है, या कोई फिक्स्ड डिपॉजिट मैच्योर होने के 10 साल बाद भी क्लेम नहीं किया जाता, तो इसे अनक्लेम्ड डिपॉजिट माना जाता है। इसके बाद यह रकम बैंकों से RBI के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में ट्रांसफर कर दी जाती है।
आंकड़ों के अनुसार, इन अनक्लेम्ड पैसों में सबसे बड़ा हिस्सा पब्लिक सेक्टर बैंकों का है। 2024 में इसकी हिस्सेदारी लगभग 74.47% थी और 2025 में 74.18% रही। यानी बिना क्लेम वाली रकम का अधिकतर हिस्सा सरकारी बैंकों में ही जमा है।
सरकार और RBI ने इन पैसों को असली मालिकों तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। सितंबर 2025 में RBI ने मृत खाताधारकों के खातों के निपटान के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए। अक्टूबर 2025 से एक इंसेंटिव स्कीम भी शुरू हुई, जिसके तहत बैंक सफल निपटान पर 5% से 7.5% तक प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान चलाया। इसका परिणाम भी देखने को मिला। 28 फरवरी 2026 तक करीब 5,777 करोड़ रुपये की अनक्लेम्ड राशि असली मालिकों को वापस दिलाई जा चुकी है।
भविष्य में अनक्लेम्ड डिपॉजिट की समस्या कम करने के लिए बैंकिंग नियम (संशोधन) अधिनियम 2025 में बदलाव किया गया। अब बैंक खातों में केवल एक की जगह अधिकतम चार नॉमिनी जोड़ने की सुविधा दी गई है। इससे पैसों के बिना दावे के पड़े रहने की संभावना काफी कम हो जाएगी और असली मालिकों तक रकम आसानी से पहुंच सकेगी।