नयी दिल्ली, पांच दिसंबर (भाषा) बैंकों ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान 10.57 लाख करोड़ रुपये की राशि बट्टे खाते में डाली है। इनमें से 5.52 लाख करोड़ रुपये की राशि बड़े उद्योगों से संबंधित ऋणों के संदर्भ में हैं। सरकार ने मंगलवार को संसद को यह जानकारी दी।
वित्त राज्यमंत्री भागवत कराड ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ’’रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान 10.57 लाख करोड़ रुपये की कुल ऋण राशि बट्टे खाते में डाली है।’’
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने पांच साल की अवधि के दौरान 7.15 लाख करोड़ रुपये की गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की वसूली भी की है।
उन्होंने कहा, ‘‘एनपीए की वसूली के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं, जिससे एससीबी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान बट्टे खाते में डाले गए ऋणों सहित एनपीए खातों में 7,15,507 करोड़ रुपये की कुल वसूली की है।’’
एक अलग प्रश्न के उत्तर में, कराड ने कहा, ‘‘अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान, यानी वित्त वर्ष 2018-19 से वित्त वर्ष 2022-23 तक बड़े उद्योगों और सेवाओं से संबंधित ऋणों के संबंध में 5.52 लाख करोड़ रुपये की कुल राशि बट्टे खाते में डाली है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इसमें पांच साल की अवधि के दौरान सभी बैंकों द्वारा धोखाधड़ी के कारण बट्टे खाते में डाले गए 93,874 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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