टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में फिर से लाना हमारी प्राथमिकताः नवनियुक्त उद्योग मंत्री

टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में फिर से लाना हमारी प्राथमिकताः नवनियुक्त उद्योग मंत्री

टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में फिर से लाना हमारी प्राथमिकताः नवनियुक्त उद्योग मंत्री
Modified Date: June 10, 2026 / 06:39 pm IST
Published Date: June 10, 2026 6:39 pm IST

कोलकाता, 10 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त उद्योग मंत्री तापस रॉय ने बुधवार को कहा कि वह टाटा समूह से बड़े पैमाने पर निवेश लाने के इच्छुक हैं और इसके जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि राज्य औद्योगिक पुनरुद्धार के लिए तैयार है।

रॉय ने कहा कि उन 6,500 से अधिक उद्यमों और उद्यमियों को भी वापस लाने के प्रयास किए जाएंगे जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपने परिचालन को राज्य से बाहर स्थानांतरित कर दिया था।

पश्चिम बंगाल में पिछले माह गठित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के विस्तारित मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के 10 दिन बाद मंत्रियों को विभागों का आवंटन किया गया।

रॉय ने उद्योग विभाग आवंटित होने के बाद संवाददाताओं से कहा कि भाजपा सरकार पश्चिम बंगाल में निवेशकों का विश्वास बहाल करने के लिए काम करेगी और आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने निवेशकों की धारणा को नुकसान पहुंचाया था।

उन्होंने कहा, “मेरी प्राथमिकता राज्य में टाटा समूह को बड़े पैमाने पर वापस लाने की होगी। तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार द्वारा पैदा की गई स्थिति दयनीय थी। हम यह सशक्त संदेश देना चाहते हैं कि बंगाल एक बार फिर उद्योग के लिए तैयार है।”

रॉय ने कहा, ‘‘निवेश आकर्षित करने के लिए हम देश-विदेश के उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से बातचीत करेंगे।’’

टाटा मोटर्स ने 2008 में लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच यहां कार विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने की अपनी योजना छोड़ दी थी। इसके बाद राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में आए व्यापक बदलाव के बीच वाममोर्चा की जगह तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आ गई।

पश्चिम बंगाल के नए उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार उद्योग-अनुकूल वातावरण बनाने, कारोबारी सुगमता सुनिश्चित करने और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

कांग्रेस से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले रॉय बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि पिछले लोकसभा चुनावों से पहले वह पार्टी नेतृत्व से मतभेदों का हवाला देते हुए भाजपा में शामिल हो गए थे।

भाषा यासिर प्रेम

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