नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) भारत तकनीकी-व्यावसायिक व्यावहारिकता के आधार पर ईरान से तेल की खरीद फिर से शुरू करने पर विचार करेगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह बात कही।
अधिकारी ने अमेरिका के तेल कीमतों पर दबाव कम करने के लिए ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने के बाद यह बात कही।
ऐतिहासिक रूप से, भारत ईरान से कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है। रिफाइनरी के हिसाब तेल के अनुकूल होने और बेहतर व्यापार शर्तों के कारण ईरानी लाइट और हेवी ग्रेड के तेल की महत्वपूर्ण मात्रा में आयात किया जाता था। 2018 में प्रतिबंधों के कड़े होने के बाद, मई, 2019 से आयात बंद हो गया और इसकी जगह पश्चिम एशिया, अमेरिकी और अन्य ग्रेड के तेल का आयात किया जाने लगा। एक समय, ईरान के कच्चे तेल की भारत के कुल आयात में 11.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि ईरानी कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू करने का निर्णय तकनीकी-व्यावसायिक व्यवहारिकता के आधार पर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह तकनीकी-व्यावसायिक व्यवहारिकता पर आधारित है।’’
अमेरिका ने सप्ताहांत में पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी को कम करने के अपने नवीनतम प्रयास के तहत, ईरानी तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों को 30 दिन के लिए हटा दिया। एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल समुद्र में जहाजों पर मौजूद है।
हालांकि, इस छूट से देशों को ईरानी तेल को खरीदने की अनुमति मिल गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि भुगतान कैसे किया जाएगा।
ईरान अभी भी स्विफ्ट (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) से अलग-थलग है। यह एक वैश्विक संदेश नेटवर्क है जिसका उपयोग बैंक और वित्तीय संस्थान वित्तीय लेनदेन के बारे में सुरक्षित रूप से जानकारी भेजने और प्राप्त करने के लिए करते हैं।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, ईरान से अंतिम खरीद यूरो में की गई थी। उसमें एक तुर्की बैंक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, लेकिन अब यह विकल्प उपलब्ध नहीं है।
ईरान को मार्च, 2012 में उसके परमाणु कार्यक्रम पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद स्विफ्ट प्रणाली से अलग कर दिया गया था। इसके कारण कई ईरानी बैंक भी अलग हो गए और वैश्विक वित्तीय लेनदेन बुरी तरह प्रभावित हुए।
अमेरिका के 2018 में प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के बाद और भी समस्याएं उत्पन्न हुईं। इसके कारण कई ईरानी बैंकों को नेटवर्क से फिर से निलंबित कर दिया गया। इससे ईरान की अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने, तेल भुगतान प्राप्त करने और विदेशी मुद्रा भंडार तक पहुंच बनाने की क्षमता को काफी हद तक सीमित हुई।
केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि चीनी खरीदारों और अन्य एशियाई देशों के साथ-साथ भारत, ईरान के कच्चे तेल के लिए एक प्रमुख मांग केंद्र के रूप में उभर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में, ईरानी कच्चे तेल की उपलब्धता उच्च बनी हुई है। इसमें अनुमानित 17 करोड़ बैरल का भंडार है, जिसमें फ्लोटिंग स्टोरेज और पारगमन वाले कार्गो शामिल हैं।’’
भाषा रमण अजय
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