नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट वित्तीय व्यवस्था में भरोसे के संरक्षक होते हैं और उनके मानकों को कम नहीं किया जाना चाहिए।
राधाकृष्णन ने नैतिक तौर-तरीकों के महत्व का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि नैतिकता के बिना आर्थिक वृद्धि का कोई मतलब नहीं है।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय राजधानी में 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘ भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) को परीक्षा के मानकों को कम नहीं करना चाहिए क्योंकि चार्टर्ड अकाउंटेंट वित्तीय व्यवस्था में भरोसे को बनाये रखने का काम करते हैं।’’
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘चार्टर्ड अकाउंटेंट वित्तीय व्यवस्था में भरोसे के संरक्षक होते हैं…।’’ उन्होंने अपने संबोधन में आईसीएआई की ईमानदारी, उत्कृष्टता, जवाबदेही और देश सेवा की परंपरा का उल्लेख किया।
उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट से आग्रह किया कि वे ईमानदार उद्यमों की रक्षा करें तथा अनैतिक तौर-तरीकों के खिलाफ सख्ती से पेश आकर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करें।
राधाकृष्णन ने कहा कि कारोबार सुगमता देश की कानूनी रूपरेखा में होनी चाहिए और गुणवत्ता से समझौता करके पैसे बचाना विनाशकारी होगा।
उपराष्ट्रति ने यह भी कहा कि आईसीएआई के जिला-स्तरीय संगठनों को ‘एक जिला एक उत्पाद’ पहल के तहत पहचाने गए उत्पादों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। ऐसी कोशिशों से वे उत्पादकों को गुणवत्ता से समझौता किए बिना लागत कम करने में मदद कर पाएंगे। इससे प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी।
राधाकृष्णन ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट परीक्षा के ऊंचे मानकों के कारण इसमें विफल होने वालों की संख्या ‘सबसे कम’ है और इन मानकों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कंपनियों को उनकी लागत कम करने में मदद करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और कॉस्ट अकाउंटेंट को मिलकर काम करना चाहिए।
भाषा रमण अजय
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