नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) सरकार ने बुधवार को राशन की दुकानों के जरिये 80 करोड़ से अधिक लोगों को वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का फैसला किया। इसके लिए कुल आपूर्ति में टूटे हुए चावल की मात्रा को कम किया जाएगा।
केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राशन की दुकानों से आपूर्ति किये जाने वाले चावल में टूटे हुए चावल की सीमा को कम करने का फैसला किया है।
कच्चे चावल के लिए, यह सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है।
उसना चावल के लिए, इसे 16 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है।
जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, मंत्रिमंडल ने भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव लाने वाला फैसला लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘लगभग तीन दशक में पहली बार, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत बांटे जाने वाले चावल की गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाया गया है।’’
जोशी ने कहा कि इससे 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सम्मान के साथ बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन मिलना सुनिश्चित होगा।
जोशी ने कहा कि यह ‘‘महत्वपूर्ण सुधार सरकार की बेहतर गुणवत्ता उपलब्ध कराने, अनाज के हर दाने का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने, खाद्य पदार्थों की आवाजाही की पूरी जानकारी के जरिये पारदर्शिता बढ़ाने और समझदारी से लागत को सही करके कार्यक्षमता में सुधार करने की प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है।’’
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत, सरकार हर व्यक्ति को हर महीने पांच किलो अनाज (चावल और गेहूं) मुफ्त देती है। अंत्योदय अन्न योजना श्रेणी में आने वाले परिवारों को हर महीने 35 किलो अनाज मिलता है।
भाषा रमण अजय
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