एमएसएमई विनिर्माताओं, निर्यातकों की मदद के लिए साझा ऋण गारंटी योजना में संशोधन

Ads

एमएसएमई विनिर्माताओं, निर्यातकों की मदद के लिए साझा ऋण गारंटी योजना में संशोधन

  •  
  • Publish Date - March 21, 2026 / 08:43 PM IST,
    Updated On - March 21, 2026 / 08:43 PM IST

नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि एमएसएमई के लिए साझा ऋण गारंटी योजना (एमसीजीएस- एमएसएमई) में विनिर्माताओं और निर्यातकों को सहायता देने के लिए बदलाव किए गए हैं। इसके तहत चौथे साल के बाद किस्तों में पांच प्रतिशत अग्रिम योगदान की अनुमति दी गई है।

संशोधित योजना के अनुसार, अब इसमें सेवा क्षेत्र को भी शामिल कर लिया गया है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उपकरण/मशीनरी की लागत को परियोजना लागत के पिछले 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।

राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) ने इस संशोधित योजना को 24 फरवरी, 2026 से लागू कर दिया है।

संशोधित योजना के अनुसार, अब ऋण गारंटी 10 वर्षों के बाद खत्म हो जाएगी, जबकि पिछली योजना में इसकी समयसीमा निर्धारित नहीं थी।

पात्रता का विवरण देते हुए मंत्रालय ने कहा कि ऐसी लाभदायक इकाइयां जिन्होंने पिछले तीन वित्त वर्षों में से प्रत्येक में अपने बिक्री कारोबार का कम से कम 25 प्रतिशत निर्यात किया है और निर्यात प्राप्ति की कुछ शर्तों को पूरा करती हैं, वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र हैं।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय