देश को 100 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखना चाहिए: नितिन गडकरी
देश को 100 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखना चाहिए: नितिन गडकरी
नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि देश को निकट भविष्य में 100 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल आपूर्ति की अनिश्चितता ने देश के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना जरूरी कर दिया है।
उन्होंने कहा कि एक अप्रैल से लागू होने वाले कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता-तीन मानकों का इलेक्ट्रिक और ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ वाहनों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
‘फ्लेक्स फ्यूल’ वाहन एक ऐसा वाहन है जिसमें पेट्रोल/डीजल इंजन लगा होता है और इसे एक से अधिक प्रकार के ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। आमतौर पर पेट्रोल को एथनॉल या मेथनॉल के साथ मिलाकर ‘फ्लेक्स फ्यूल’ के रूप में इसका उपयोग किया जाता है।
गडकरी ने इंडियन फेडरेशनल ऑफ ग्रीन एनर्जी के हरित परिवहन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, इसलिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में नरेन्द्र मोदी ने 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) की शुरुआत की थी और वर्तमान में वाहन मामूली बदलाव के साथ इस पर चल सकते हैं। ब्राजील जैसे देशों में 100 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण पहले से लागू है।
गडकरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 87 प्रतिशत तेल आयात करता है और हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात किया जाता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है। इसलिए वैकल्पिक ईंधन और जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ाना जरूरी है।
हरित हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताते हुए उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन पंप के संचालन की लागत कम करना जरूरी है, ताकि यह आर्थिक रूप से व्यवहारिक बन सके। साथ ही, हाइड्रोजन के परिवहन में भी चुनौतियां हैं और इसकी लागत घटाकर करीब एक डॉलर प्रति किलोग्राम करना होगा, ताकि भारत ऊर्जा निर्यातक बन सके।
गडकरी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करना जरूरी है, लेकिन लोगों को इन्हें खरीदने से जबरन नहीं रोका जा सकता।
उन्होंने वाहन कंपनियों से लागत के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान देने को कहा, ताकि वे नए बाजारों में बेहतर तरीके से अपनी पहुंच बना सकें।
भाषा योगेश रमण
रमण

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