चालू खाते का घाटा पहली तिमाही में बढ़कर 4.2 अरब डॉलर पर: आरबीआई आंकड़ा

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चालू खाते का घाटा पहली तिमाही में बढ़कर 4.2 अरब डॉलर पर: आरबीआई आंकड़ा

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  • Publish Date - September 1, 2026 / 08:23 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 08:23 PM IST

मुंबई, एक सितंबर (भाषा) देश का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बढ़कर 4.2 अरब डॉलर यानी सकल घरेलू उत्पाद का 0.5 प्रतिशत रहा। पश्चिम एशिया संकट के बीच वस्तु व्यापार घाटा तेजी से बढ़ने से चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ा है।

भारतीय रिजर्व बैंक के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, एक साल पहले इसी तिमाही में चालू खाते का घाटा 3.4 अरब डॉलर यानी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 0.4 प्रतिशत था।

चालू खाते का घाटा तब होता है जब कोई देश विदेशी वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और हस्तांतरण के लिए विदेशों में बाकी दुनिया से प्राप्त होने वाली राशि से अधिक पैसा भेजता है।

आरबीआई के भुगतान संतुलन के आंकड़ों के अनुसार, देश का वस्तु व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में 86.1 अरब डॉलर रहा, जो बीते वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 68.9 अरब डॉलर था।

केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘भारत का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 4.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.5 प्रतिशत) रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में यह 3.4 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.4 प्रतिशत) था।

आंकड़ों के अनुसार, आलोच्य तिमाही में शुद्ध सेवा प्राप्तियां बढ़कर 51.6 अरब डॉलर हो गई, जो एक साल पहले 47.9 अरब डॉलर थीं।

आरबीआई ने कहा, ‘‘कंप्यूटर सेवाओं, अन्य कारोबारी सेवाओं और परिवहन सेवाओं सहित प्रमुख श्रेणियों में सेवा निर्यात में सालाना आधार पर वृद्धि हुई।’’

प्राथमिक आय खाते में शुद्ध भुगतान वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घटकर 10.5 अरब डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही में 13.3 अरब डॉलर था। इसमें मुख्य रूप से निवेश आय का भुगतान शामिल है।

आंकड़ों के अनुसार, द्वितीयक आय खाते में विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की ओर से भेजी गई राशि समेत व्यक्तिगत अंतरण प्राप्तियां भी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 42.9 अरब डॉलर हो गईं। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 33.2 अरब डॉलर थीं।

इस बीच, अप्रैल-जून तिमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का शुद्ध प्रवाह 6.1 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 5.2 अरब डॉलर था।

दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश से 9.6 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी हुई, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में 1.6 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया था।

आंकड़ों के अनुसार, प्रवासी जमा से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 2.8 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 3.6 अरब डॉलर था।

भारत में बाह्य वाणिज्यिक उधारी के तहत भी पहली तिमाही में शुद्ध प्रवाह एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में कम रहा।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 8.1 अरब डॉलर (भुगतान संतुलन के आधार पर) की कमी आई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में इसमें 4.5 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी।

भुगतान संतुलन किसी निश्चित अवधि में किसी देश और दुनिया के बाकी देशों के बीच होने वाले सभी आर्थिक लेन-देन का लेखा-जोखा होता है।

भाषा रमण अजय

अजय