नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) विदेशी बाजारों में कमजोरी के रुख तथा भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिये जाने के बाद देश में खाद्य तेलों का शुल्क-मुक्त आयात बढ़ने की अफवाहों के बीच देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट देखी गई। वहीं कम उपलब्धता और मांग होने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में मजबूती रही।
बीते सप्ताह शुक्रवार देर रात को सरकार ने आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि करते हुए कच्चे पामतेल (सीपीओ) पर आयात शुल्क मूल्य 30 रुपये क्विंटल, पामोलीन पर 35 रुपये क्विंटल और सोयाबीन डीगम तेल पर 24 रुपये क्विंटल बढ़ाया है।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि पिछले सप्ताह विदेशी बाजारों में गिरावट का रुख रहा। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप अभी दिया जाना बाकी है। लेकिन किसानों को समझौते के बाद देश में सोयाबीन जैसे खाद्य तेलों का शुल्क मुक्त आयात बढ़ने को लेकर आशंका और चिंता है। इस तथ्य का भी तेल-तिलहन बाजार में दबाव महसूस किया गया और अधिकांश खाद्य तेल-तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए।
सूत्रों ने कहा कि सरसों का दाम अपने न्यूनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक है। सरसों की नई फसल मंडियों में आने को तैयार खड़ी है। कुछ स्थानों पर थोड़ी बहुत मात्रा में नई सरसों फसल आना भी शुरू हो गई है। नई सरसों फसल की स्थिति बेहतर है और इसमें तेल की मात्रा भी अधिक है। किसानों को दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। नई फसल को सामने देखते हुए तेल मिलें खरीद का दाम भी कम करने की कोशिश में लगी हैं। मौसम खुलने के बाद सरसों की आवक बढ़ेगी जिसके बाद दाम और टूटने की उम्मीद है।
इन परिस्थितियों के बीच बीते सप्ताह अपने पूर्व सप्ताहांत के मुकाबले सरसों तेल-तिलहन के दाम में गिरावट रही।
उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह विदेशों में खाद्य तेल कीमतों में गिरावट का रुख था और सोयाबीन प्लांट वाले ही कभी दाम घटाते हैं तो कभी बढ़ाते हैं। किसान सोयाबीन के ऊंचे दाम का स्वाद चख चुके हैं और अब दाम कम करने पर वे बाजार में आवक लाना कम कर रहे हैं जिससे मंडियों में उपलब्धता कम रहने के कारण तेल संयंत्र पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। इन परिस्थितियों में बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में भी गिरावट रही।
उन्होंने कहा कि ब्राजील में भी सोयाबीन की फसल अच्छी है और वहां के कारोबारी तीन-चार महीने के आगे के सौदे मौजूदा हाजिर दाम से लगभग 8-10 रुपये किलो नीचे दाम पर बेच रहे हैं। इससे भी सोयाबीन तेल-तिलहन पर दबाव बना रहा।
सूत्रों ने कहा कि मंडियों में मूंगफली की उपलब्धता कम है और इसकी मांग भी है। यह भी तथ्य है कि दाम ऊंचा होने से लिवाली का स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। मांग होने और कम उपलब्धता के कारण बीते सप्ताह केवल मूंगफली तेल-तिलहन के दाम सुधार के साथ बंद हुए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में सोयाबीन बाजार में ठीक से नहीं चल पा रहा है, ऐसे में पाम-पामोलीन की कहां से मांग निकलेगी। जाड़े की वजह से भी इसकी मांग प्रभावित है। ऐसी स्थिति में बीते सप्ताह पाम-पामोलीन के दाम भी गिरावट दर्शाते बंद हुए।
शिकॉगो एक्सचेंज सोमवार को बंद है। मंगलवार को यहां कारोबार शुरू होने के बाद आगे के रुख के बारे में कोई संकेत मिलेगा।
सूत्रों ने कहा कि विदेशी तेलों में कमजोर कारोबारी धारणा होने के बीच बिनौला तेल के दाम भी पर्याप्त गिरावट के साथ बंद हुए।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 40 रुपये की गिरावट के साथ 6,910-6,935 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 50 रुपये की गिरावट के साथ 14,200 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 10-10 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,390-2,490 रुपये और 2,390-2,535 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुए।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 250-250 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 5,350-5,400 रुपये और 4,950-5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 250 रुपये की गिरावट के साथ 14,350 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 250 रुपये की गिरावट के साथ 13,950 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 300 रुपये की गिरावट के साथ 11,200 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
उन्होंने कहा कि बाजार के आम रुख के उलट, जाड़े में साबुत खाने और अच्छी गुणवत्ता के खाद्य तेल की मांग बढ़ने से अकेले मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतों में सुधार देखा गया। मूंगफली तिलहन 125 रुपये सुधरकर 7,125-7,500 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 400 रुपये के सुधार के साथ 17,500 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 2,775-3,075 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
बीते सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 175 रुपये की गिरावट के साथ 11,725 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 200 रुपये की गिरावट के साथ 13,625 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव 200 रुपये की गिरावट के साथ 12,525 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
गिरावट के आम रुख के बीच, समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल का दाम भी 250 रुपये की गिरावट के साथ 13,050 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
अजय
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