दिल्ली सरकार ने स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी दी, 400 करोड़ रुपये का निवेश होगा

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दिल्ली सरकार ने स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी दी, 400 करोड़ रुपये का निवेश होगा

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 06:55 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 06:55 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के लिए स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि हाल में मंत्रिमंडल की बैठक में राजधानी में नवोन्मेषण, अनुसंधान और उद्यमिता को नई दिशा देने के उद्देश्य से दिल्ली स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि इस नीति के तहत अगले पांच साल में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य दिल्ली को देश के अग्रणी नवाचार और उद्यमिता केंद्र के रूप में विकसित करना और युवाओं को अपने विचारों को सफल स्टार्टअप में बदलने के लिए आवश्यक व हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराना है।

गुप्ता ने कहा कि यह नीति केवल स्टार्टअप शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली के युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा, “सरकार चाहती है कि छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, पूर्व छात्रों और नए उद्यमियों के पास यदि कोई अच्छा विचार है तो उसे आगे बढ़ाने के लिए उन्हें संसाधन, मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता की कमी महसूस न हो।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि नीति के तहत दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों में मजबूत नवोन्मेष तंत्र विकसित किया जाएगा।

बयान के मुताबिक, यह नीति 11 राज्य विश्वविद्यालयों, 13 सरकारी वित्तपोषित कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में लागू होगी, जबकि सरकारी स्कूल के विद्यार्थी इन संस्थानों में इस नीति का लाभ उठा सकते हैं और कामयाब होने पर विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

बयान में कहा कि सरकार पात्र शैक्षणिक संस्थानों में इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इसके अलावा इन इन्क्यूबेशन सेंटर के संचालन, निगरानी, नेटवर्किंग, नवाचार गतिविधियों और स्टार्टअप तंत्र के विकास के लिए हर वर्ष संचालन संबंधी वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

गुप्ता ने बताया, “इस नीति के तहत इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़े स्टार्टअप को उनके विकास के विभिन्न चरणों में लक्ष्य-आधारित वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। यह सहायता प्रोटोटाइप तैयार करने, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट विकसित करने, उत्पाद तैयार करने, बाजार में उसकी उपयोगिता परखने और उसके व्यवसायीकरण तक के विभिन्न चरणों में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि अच्छे विचार सफल उद्यम का रूप ले सकें।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति युवाओं को केवल व्यवसाय शुरू करने में ही मदद नहीं करेगी, बल्कि दिल्ली में नवाचार की संस्कृति को मजबूत करेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, शोध आधारित नवोन्मेषण को बढ़ावा देगी, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों में सहयोग को मजबूत बनाएगी तथा दिल्ली की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।

उन्होंने कहा कि इस नीति की एक विशेष पहल ‘वार्षिक दिल्ली स्टार्टअप युवा मोहत्सव’ होगी, जिसे राजधानी में नवाचार के प्रमुख मंच के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ‘स्टेट इन्क्यूबेशन पॉलिसी मॉनिटरिंग’ कमेटी (एसआईपीएमसी) नीति के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी। इस समिति में सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और स्टार्टअप तंत्र के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

भाषा नोमान नोमान अजय

अजय