मुंबई, 16 जुलाई (भाषा) देश में वित्तीय समावेशन की स्थिति दर्शाने वाला सूचकांक (एफआई-इंडेक्स) वित्त वर्ष 2025-26 में 4.48 प्रतिशत बढ़कर 70 पर पहुंच गया, जो उसके एक साल पहले 67 के स्तर पर था।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि मार्च, 2026 में समाप्त होने वाले वर्ष के लिए सूचकांक का संकलन किया जा चुका है और इसमें सभी उप-सूचकांकों में वृद्धि दर्ज की गई है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस वर्ष वित्तीय समावेशन सूचकांक में सुधार मुख्य रूप से उपयोग में बढ़ोतरी के कारण हुआ है, जो वित्तीय समावेशन की गहराई को दर्शाता है।
आरबीआई ने सरकार एवं संबंधित पक्षों के साथ परामर्श के बाद इस समग्र वित्तीय समावेशन सूचकांक का निर्माण किया है। इसे पहली बार अगस्त, 2021 में मार्च, 2021 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए जारी किया गया था।
यह सूचकांक बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक तथा पेंशन क्षेत्र से संबंधित पहलुओं को शामिल करता है और वित्तीय समावेशन के विभिन्न आयामों को एक ही मान में प्रस्तुत करता है।
इस सूचकांक का मान शून्य से 100 के बीच होता है, जिसमें ‘शून्य’ मान पूर्ण वित्तीय बहिष्करण जबकि ‘100’ मान पूर्ण वित्तीय समावेशन को दर्शाता है।
इस सूचकांक के तीन प्रमुख घटकों में पहुंच (35 प्रतिशत), उपयोग (45 प्रतिशत) और गुणवत्ता (20 प्रतिशत) शामिल हैं। प्रत्येक घटक कई संकेतकों के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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