दिल्ली उच्च न्यायालय ने डाबर के ‘100 प्रतिशत’ दावों पर एफएसएसएआई के आदेश पर लगाई रोक

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने डाबर के ‘100 प्रतिशत’ दावों पर एफएसएसएआई के आदेश पर लगाई रोक

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  • Publish Date - August 7, 2026 / 03:33 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 03:33 PM IST

नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खाद्य नियामक एफएसएसएआई के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें डाबर इंडिया को शहद, गाय का घी और खाद्य तेल जैसे उत्पादों को ‘100 प्रतिशत’ दावों के साथ बेचने से प्रतिबंधित किया गया था।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि डाबर लंबे समय से इन उत्पादों की बिक्री कर रही है और प्रथम दृष्टया उसे राहत देने का मामला बनता है, क्योंकि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आदेश पारित करने से पहले कंपनी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया था।

न्यायमूर्ति महाजन ने कहा, “न्यायालय का प्रथम दृष्टया यह मत है कि सुनवाई का अवसर दिए बिना प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए था। अगली सुनवाई तक विवादित आदेश पर रोक रहेगी।”

इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध की है।

डाबर की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि एफएसएसएआई का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई के पारित किया गया है।

वहीं, केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने खाद्य नियामक के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि कंपनी को पहले ‘सुधार नोटिस’ एवं परामर्श जारी किए गए थे तथा उसके उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत’ का दावा भ्रामक है।

एफएसएसएआई ने सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, जिन पर ‘100 प्रतिशत’ जैसे भ्रामक दावे किए गए हैं। इनमें शहद, सेब का सिरका, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण