महिलाओं को मंच अर्थव्यवस्था से जोड़ने में डिजिटल वित्तीय समावेश महत्वपूर्ण: आईएलओ-एनसीएईआर
महिलाओं को मंच अर्थव्यवस्था से जोड़ने में डिजिटल वित्तीय समावेश महत्वपूर्ण: आईएलओ-एनसीएईआर
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) महिलाओं को मंच आधारित अर्थव्यवस्था में बेहतर रोजगार हासिल करने में मदद करने के लिए डिजिटल वित्तीय समावेश महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और शोध संस्थान एनसीएईआर की सोमवार को जारी एक संयुक्त रिपोर्ट में यह कहा गया।
मंच आधारित अर्थव्यवस्था से आशय डिजिटल माध्यमों से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री समेत कारोबारी गतिविधियों से है।
आईएलओ-एनसीएईआर ने बयान में कहा कि मंच आधारित कार्यों में काम के घंटे और स्थान को लेकर लचीलापन होने के बावजूद रोजगार के इस नए क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सीमित है।
संयुक्त नीति रिपोर्ट के अनुसार, भारत में संगठित वित्तीय सेवाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर रहना महिलाओं के लिए एक बड़ी बाधा है। इसके अलावा डिजिटल साक्षरता की कमी, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और सामाजिक बंधन भी उनके लिए चुनौती हैं।
‘मंच आधारित अर्थव्यवस्था में महिलाओं के डिजिटल वित्तीय समावेश को बढ़ावा देना’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को मंच आधारित काम से जुड़ने और उसमें आगे बढ़ने के लिए पूरी वित्तीय सेवाओं की जरूरत है। इसमें शुरुआत के लिए पूंजी, आय या स्वास्थ्य से जुड़े अचानक झटकों से निपटने के लिए अल्पकालिक ऋण और बीमा तथा आगे बढ़ने के लिए बचत, ऋण और वित्तीय योजना से जुड़े साधन शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, महिला मंच कर्मियों के लिए संपत्ति के आधार पर ऋण देने के बजाय आय के नियमित प्रवाह के आधार पर ऋण देने की व्यवस्था वित्तीय समावेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है।
चूंकि महिलाओं के अपने नाम पर जमीन या संपत्ति होने की संभावना काफी कम होती है, ऐसे में यह काफी महत्वपूर्ण है।
नीति रिपोर्ट जारी होने के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लॉयड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के महानिदेशक सुरेश गोयल ने कहा, ‘‘एक महिला के लिए अपनी थोड़ी-सी राशि सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। बेहतर रोजगार के अवसरों के लिए ऋण और आवागमन की सुविधा तक पहुंच महत्वपूर्ण शर्तें हैं। मंच आधारित अर्थव्यवस्था ने यह अवसर दिया है।’’
आईएलओ की क्षेत्रीय निदेशक मिचिको मियामोतो ने कहा, ‘‘डिजिटल वित्तीय समावेश से महिलाओं को आय की सुरक्षा, मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की क्षमता और टिकाऊ आजीविका बनाने में मदद मिलनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नियामकों, मंच ‘एग्रीगेटर’ और वित्तीय सेवा प्रदाताओं के समन्वित प्रयासों से डिजिटल वित्त तक पहुंच महिलाओं के लिए बेहतर रोजगार और अधिक आर्थिक अवसरों का वास्तविक माध्यम बन सकती है।’’
आईएलओ-एनसीएईआर की रिपोर्ट के अनुसार, मंच से जुड़े काम करने वाली महिलाएं भुगतान जमा होने का सत्यापन योग्य डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करती हैं। इससे उनकी आय का प्रमाण उपलब्ध होता है और कर्ज देने वाले वित्तीय संस्था संपत्ति के बजाय उनकी कमाई के आधार पर यह आकलन कर सकती है कि वे ऋण चुकाने में सक्षम हैं या नहीं।
रिपोर्ट में मंचों पर महिलाओं के डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने के दो तरीके बताए गए हैं।
खाता ‘एग्रीगेटर’ व्यवस्था जैसी भारत की डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा प्रणाली यह सुनिश्चित कर सकती है कि महिलाओं के वित्तीय आंकड़ों को आसानी से साझा किया जा सके, जिससे बैंक उनकी आय का आकलन कर सकें।
इसके अलावा, कोई मंच अपने कामकाज से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल कर कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों के साथ सीधे साझेदारी कर सकता है और अपने ऐप के माध्यम से ऋण, बचत तथा बीमा जैसी सेवाएं उपलब्ध करा सकता है।
आईएलओ की वरिष्ठ विशेषज्ञ (रोजगार) राधिका कपूर ने कहा, ‘‘हमें यह तलाशना चाहिए कि भारत के वित्तीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को ई-श्रम के रिकॉर्ड से जोड़कर मंच आधारित काम करने वाली महिलाओं की वित्तीय सेवाओं तक सुरक्षित पहुंच कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि ऐसी व्यवस्थाएं महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएं….।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय समावेश का मतलब केवल बैंक खाता खोलना नहीं है। इसके लिए महिलाओं को लगातार सस्ती भुगतान सेवाओं, बचत, ऋण और बीमा तक पहुंच मिलनी चाहिए।
नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, भारत में मंच आधारित कामगारों की संख्या 2029-30 तक बढ़कर 2.35 करोड़ हो सकती है जो 2024-25 में 1.2 करोड़ थी।
भाषा रमण अजय
अजय

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