पश्चिम एशिया संकट के कारण घरेलू एल्युमीनियम ‘एक्सट्रूजन’ उद्योग ने उत्पादन घटाया

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पश्चिम एशिया संकट के कारण घरेलू एल्युमीनियम ‘एक्सट्रूजन’ उद्योग ने उत्पादन घटाया

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 04:40 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 04:40 PM IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण देश के एल्युमीनियम को विशेष आकार देने वाले (एक्सट्रूजन) उद्योग ने अपनी उत्पादन क्षमता में भारी कटौती की है। ‘एल्युमीनियम एक्सट्रूजन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (एएलईएमएआई) ने यह जानकारी दी।

क्षेत्र में गहराते तनाव ने वैश्विक स्तर पर उत्पादों और कच्चे माल की आवाजाही की व्यवस्था को पूरी तरह बाधित कर दिया है। इसके चलते कंपनियों को अपना परिचालन सालाना औसतन 12-13 लाख टन से घटाकर वर्तमान में महज 50,000-60,000 टन प्रति माह करने पर मजबूर होना पड़ा है।

एएलईएमएआई के अध्यक्ष जितेंद्र चोपड़ा ने उद्योग की चिंताओं पर कहा कि भारत के एल्युमीनियम क्षेत्र के उत्पादन में 40 से 50 प्रतिशत की गिरावट आई है।

उन्होंने बताया कि 42 लाख टन की स्थापित क्षमता होने के बावजूद वर्तमान में इसका उपयोग क्षमता से काफी कम हो रहा है और यह क्षेत्र भारी दबाव में है।

पश्चिम एशिया संकट ने एल्युमीनियम उद्योग के लिए कच्चे माल और ऊर्जा स्रोतों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस क्षेत्र से आने वाले 50 प्रतिशत कच्चे माल को उतारा नहीं जा सका है। बंदरगाहों पर काम ठप होने से कच्चे माल की आवक रुक गई है और ऊर्जा संकट के कारण उत्पादन लागत में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति बाधित होने के कारण लगभग 30-35 प्रतिशत संयंत्र बंद हो गए थे। हालांकि, पिछले 5-6 दिन में आपूर्ति आंशिक रूप से बहाल हुई है, लेकिन गैस की कमी के कारण ये इकाइयां अभी भी अपनी क्षमता के केवल 35-40 प्रतिशत पर ही काम कर पा रही हैं।

एएलईएमएआई के सचिव अंकुर अग्रवाल ने कहा कि कच्चे माल की कमी और एलपीजी की अनुपलब्धता के कारण लगभग 100-125 संयंत्र अपनी क्षमता से बहुत कम पर काम कर रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि इस संकट के प्रभाव का आकलन करने के लिए प्रतिदिन अंतर-मंत्रालयी बैठकें की जा रही हैं और सरकार इस व्यवधान को कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

भाषा सुमित अजय

अजय

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