नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत-यूरोपीय संघ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत यूरोपीय वाइन भारतीय बाजार में कम कीमतों पर उपलब्ध होंगी।
एक अधिकारी ने बताया कि भारत इस समझौते के तहत आयात शुल्क में रियायतें देगा।
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ (ईयू) की महंगी वाइन पर शुल्क 150 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रह जाएगा। हालांकि, 2.5 यूरो से कम कीमत वाली वाइन के लिए शुल्क में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, भारतीय वाइन को भी ईयू के सदस्य देशों में शुल्क रियायतें मिलेंगी।
भारत और ईयू ने मंगलवार को एफटीए के लिए बातचीत पूरी होने और उसे अंतिम रूप देने की घोषणा की। इस समझौते पर इस साल के अंत में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है और यह अगले साल की शुरुआत से लागू हो सकता है।
समझौते के तहत भारत यूरोपीय संघ की वाइन को वैसी ही शुल्क रियायतें देगा, जैसी उसने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए दी हैं, लेकिन इसमें न्यूनतम सीमा थोड़ी कम रखी गई है। यह यूरोपीय संघ की एक प्रमुख मांग थी।
अधिकारी ने कहा कि भारतीय वाइन को भी ईयू में बाजार पहुंच मिलेगी, जो वहां बढ़ रहे भारतीय प्रवासियों की मांग को पूरा कर सकती है। यूरोपीय संघ भारतीय वाइन पर शुल्क समाप्त कर देगा।
अधिकारी ने कहा, ‘‘वाहन की तरह, वाइन भी भारतीय उद्योग के लिए निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में से एक है। इसलिए उनके लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। हमने नपे-तुले तरीके से शुल्क रियायतें दी हैं। ये शुल्क सात वर्षों में कम किए जाएंगे।”
भारत ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ अपने एफटीए में भी इस क्षेत्र के लिए इसी तरह की समयसीमा दी है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते में इस्तेमाल किए गए मॉडल का पालन किया है, जिसके तहत वाइन पर शुल्क 10 वर्षों में धीरे-धीरे कम होगा।
भारत को ईयू से ‘टेबल ग्रेप्स’ (खाने वाले अंगूर) पर शुल्क में कोटा आधारित कटौती भी मिली है। यूरोपीय संघ सालाना लगभग 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स का आयात करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईयू की व्हिस्की के लिए भी शुल्क रियायतें दी गई हैं।
इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए भारत में प्रीमियम स्पिरिट और वाइन ब्रांडों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग निकाय आईएसडब्ल्यूएआई ने कहा कि यह समझौता शुल्क कटौती पर केंद्रित है और व्यापार के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी है।
आईएसडब्ल्यूएआई के सीईओ संजीत पाढ़ी ने कहा कि समझौते के विस्तृत प्रावधानों का इंतजार है, हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार सभी ईयू स्पिरिट और वाइन श्रेणियों पर आयात शुल्क को मौजूदा 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत करना एक स्वागत योग्य कदम है।
भाषा पाण्डेय रमण
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