कांगो, जाम्बिया, तंजानिया, ऑस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियों की तलाश : खान सचिव

कांगो, जाम्बिया, तंजानिया, ऑस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियों की तलाश : खान सचिव

कांगो, जाम्बिया, तंजानिया, ऑस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियों की तलाश : खान सचिव
Modified Date: February 27, 2025 / 06:23 pm IST
Published Date: February 27, 2025 6:23 pm IST

नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) सरकार ने कहा है कि देश कांगो, जाम्बिया, तंजानिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियों के खनन और खोज की संभावना तलाश रहा है।

यहां एक संवाददाता सम्मेलन में खान सचिव वी एल कांता राव ने कहा, ‘‘ऑस्ट्रेलियाई सरकार केएबीआईएल (काबिल) के साथ काम कर रही है….कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, तंजानिया और कुछ अन्य देश भी हैं जहां हमारे दूतावासों के माध्यम से…(हम) उन देशों में भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियां प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

तांबा, लिथियम, निकल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण खनिज तेजी से बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने और पवन टर्बाइन और बिजली नेटवर्क से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण तक उनके बढ़ते उपयोगों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण कच्चा माल हैं।

सचिव ने कहा कि काबिल के साथ-साथ कोल इंडिया, एनएमडीसी और ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां भी ऑस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की खोज कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि जाम्बिया सरकार ने हाल ही में भारत को कोबाल्ट और तांबे की खोज के लिए 9,000 वर्ग किलोमीटर का नया क्षेत्र देने पर सहमति जताई है।

राव ने कहा, ‘‘हमें इस खोज में दो से तीन साल लगेंगे और हमें उम्मीद है कि खोज के बाद हमें खनन अधिकार भी मिल जाएंगे।’’

लिथियम ब्लॉक की बहुत मांग की बात कहते हुए खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में कुछ लिथियम ब्लॉक की पहचान की है।

जम्मू-कश्मीर में लिथियम ब्लॉक की और खोज करने के लिए जीएसआई द्वारा एक विशेष टीम गठित करने का निर्णय लिया गया है।

मंत्री ने बताया, ‘‘इस खोज पर स्पष्टता, अप्रैल और मई के अंत तक आ जाएगी और उसके बाद हम नीलामी करेंगे।’’

रेड्डी ने कहा कि खान मंत्रालय अगले महीने खोज लाइसेंस ब्लॉक की नीलामी शुरू करेगा।

सरकार ने पिछले महीने 16,300 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन को मंजूरी दी थी, जिसमें सात वर्षों में 34,300 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता हासिल करना और हरित ऊर्जा बदलाव की दिशा में भारत की यात्रा को तेज करना है।

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की ओर से इस मिशन में 18,000 करोड़ रुपये का योगदान करने की उम्मीद है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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