पश्चिम एशिया तनाव के बीच मार्च में विदेशी उधारी प्रस्ताव घटकर 5.43 अरब डॉलर पर

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पश्चिम एशिया तनाव के बीच मार्च में विदेशी उधारी प्रस्ताव घटकर 5.43 अरब डॉलर पर

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  • Publish Date - May 14, 2026 / 07:08 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 07:08 PM IST

मुंबई, 14 मई (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय कंपनियों एवं ऋणदाताओं द्वारा विदेशी कर्ज (ईसीबी) जुटाने के प्रस्ताव मार्च में घटकर 5.43 अरब डॉलर रह गए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

ईसीबी ऐसे वाणिज्यिक ऋण होते हैं जिन्हें पात्र भारतीय संस्थाएं मान्यता-प्राप्त विदेशी संस्थाओं से लेती हैं।

आरबीआई के अनुसार, यह आंकड़ा मार्च, 2025 के 11.04 अरब डॉलर की तुलना में लगभग आधा है जबकि फरवरी, 2026 के 4.59 अरब डॉलर से अधिक है।

कुल उधारी प्रस्तावों में सामान्य अनुमति के तहत 5.22 अरब डॉलर और विशेष अनुमति के तहत 21.2 करोड़ डॉलर के प्रस्ताव शामिल हैं।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, पूंजीगत व्यय में सुस्ती की चिंताओं के बीच मार्च में नई परियोजनाओं के लिए 19 प्रस्ताव दाखिल किए गए, जिनके तहत 1.14 अरब डॉलर की विदेशी उधारी का इरादा जताया गया।

वहीं, 1.22 अरब डॉलर का उपयोग मौजूदा विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) या रुपये में लिए गए कर्ज के पुनर्वित्तपोषण के लिए प्रस्तावित है।

विदेशी उधारी जुटाने के प्रमुख प्रस्तावों में राजस्थान पार्ट-1 ट्रांसमिशन ने नई परियोजनाओं के लिए 75 करोड़ डॉलर जुटाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा, अदाणी ट्रांसमिशन स्टेप-वन ने भी मौजूदा ईसीबी के पुनर्वित्तपोषण के लिए 50 करोड़ डॉलर जुटाने का प्रस्ताव दाखिल किया।

वित्तीय कंपनियों में आईआईएफएल फाइनेंस ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से 50 करोड़ डॉलर जुटाने की मंशा जताई जबकि भारतीय रेल वित्त निगम और बजाज फाइनेंस ने क्रमशः 39.16 करोड़ डॉलर और 30 करोड़ डॉलर के प्रस्ताव दिए।

पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उधारी लागत बढ़ी है और अमेरिका के 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल 0.20-0.30 प्रतिशत तक बढ़ने से विदेशी और घरेलू उधारी लागत के बीच अंतर कम हुआ है।

इससे पहले, आरबीआई ने ईसीबी नियमों को उदार बनाते हुए कंपनियों को अधिक उधारी सीमा, मुद्रा में बदलाव और कर्ज को गैर-ऋण साधन में बदलने जैसी सुविधाएं दी हैं।

नए दिशानिर्देशों के तहत कारोबार पुनर्गठन या दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही कंपनियां भी विदेशी उधारी के जरिये धन जुटा सकती हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय