मथुरा में मक्के की फसल में दाने नहीं आने से किसान परेशान, जांच के लिए दो समितियां गठित

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मथुरा में मक्के की फसल में दाने नहीं आने से किसान परेशान, जांच के लिए दो समितियां गठित

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  • Publish Date - June 21, 2026 / 03:41 PM IST,
    Updated On - June 21, 2026 / 03:41 PM IST

मथुरा (उप्र), 21 जून (भाषा) मथुरा जिले में मक्के की फसल किसानों के लिए धोखा साबित हुई है। फसल हरी-भरी होने के बावजूद भुट्टों में दाने नहीं आए हैं। इससे खेत तैयार करने से लेकर खाद, बीज और सिंचाई पर किया गया निवेश बर्बाद होता दिख रहा है। प्रभावित किसानों ने सरकार से नुकसान की भरपाई की मांग की है।

किसानों की शिकायत पर राज्य कृषि निदेशालय ने आगरा मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव की अगुआई में जांच समिति बनाई है। समिति में उप कृषि निदेशक का प्रभार देख रहे जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. योगेश कुमार शर्मा और बीज निर्माता कंपनी हिल इंडिया का एक प्रतिनिधि शामिल है।

समिति भुट्टे, मक्का बीज की आनुवंशिक गुणवत्ता, प्रभावित खेतों की मिट्टी की सेहत व नमी समेत अन्य जरूरी तथ्यों की जांच करेगी। विशेषज्ञ यह भी देखेंगे कि फसल खराब होने के पीछे बीज की गुणवत्ता, प्रतिकूल मौसम या मिट्टी के पोषक तत्वों का असंतुलन वजह है या नहीं।

जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता के नेतृत्व में अलग टीम बनाई है। इसमें जिला कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रशांत वर्मा और वरिष्ठ सहायक कृषि रक्षाकर्मी संजीव कुमार शामिल हैं।

जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट में बीजों में खराबी या धोखाधड़ी मिलने पर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। बीज निर्माता को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

सिंह के अनुसार, राया के राजकीय कृषि बीज भंडार से सब्सिडी पर मक्के का बीज खरीदने वाले किसानों ने शिकायत की है। जिले के 54 किसानों ने हिल इंडिया कंपनी का 16 क्विंटल बीज इस्तेमाल किया था, जो राजकीय भंडारों से बांटा गया था।

अधिकारी ने बताया कि यह हाइब्रिड बीज तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील है। इसे बोने का सही समय फरवरी है। 10 मार्च तक बुवाई करने वालों की फसल ठीक है। लेकिन जिन्होंने आलू या गेहूं के बाद, यानी 10 मार्च के बाद 38-40 डिग्री तापमान में बुवाई की, उनकी फसल सूख गई। इससे भुट्टों में दाने नहीं पड़े और फसल बर्बाद हो गई।

इसी कंपनी का बीज मथुरा के अन्य क्षेत्रों में भी इस्तेमाल हुआ है, जहां फसल में भरपूर दाने आए हैं। लेकिन बलदेव विकास खंड के किसानों की फसल में दाना नहीं पड़ा। मौके पर जांच में शिकायत सही मिली।

सिंह ने कहा कि प्रभावित और अप्रभावित फसल का औसत निकालकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उसी के आधार पर विशेषज्ञों की राय से मुआवजा देने या न देने और राशि तय करने का निर्णय होगा।

भाषा सं आनन्द रंजन अजय

अजय