जनता के आक्रोश से डरकर कुछ बागी सांसद शिवसेना (उबाठा) के संपर्क में हैं: राउत

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जनता के आक्रोश से डरकर कुछ बागी सांसद शिवसेना (उबाठा) के संपर्क में हैं: राउत

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  • Publish Date - June 21, 2026 / 03:43 PM IST,
    Updated On - June 21, 2026 / 03:43 PM IST

मुंबई, 21 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि कुछ बागी सांसद पार्टी के संपर्क में हैं, क्योंकि वे अपने चुनाव क्षेत्रों में जनता के आक्रोश से डरे हुए हैं। राउत ने कहा कि ऐसे सांसदों में से कम से कम दो के साथ अभी बातचीत चल रही है।

पत्रकारों से बात करते हुए राज्यसभा सदस्य ने कहा कि अगर सांसदों को लगता है कि उनसे गलती हुई है, तो उनसे बातचीत की जा सकती है। राउत ने दावा किया कि दो सांसदों के साथ अभी बातचीत चल रही है।

राउत ने कहा, ‘‘कुछ सांसद अब भी संपर्क में हैं। वे अपने चुनाव क्षेत्र में लोगों के आक्रोश के कारण डरे हुए हैं।’’

राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा है कि अब कोई गुट नहीं बचा है, और केवल एक ही शिवसेना है, जिसके प्रमुख एकनाथ शिंदे हैं।

उन्होंने शाह पर शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे और महाराष्ट्र का अपमान करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि केवल एक ही शिवसेना है, जिसके प्रमुख अभी उद्धव ठाकरे हैं।

राउत ने कहा, ‘‘आप जितना अधिक शिवसेना (उबाठा) का अपमान करेंगे, राज्य के लोग आपके उतने ही खिलाफ खड़े होंगे।’’

उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से सभी बागी सांसद अब भी शिवसेना (उबाठा) के साथ हैं और इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का कोई आदेश नहीं आया है, यहां तक कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है कि वे पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

राउत ने कहा कि छह सांसदों ने यह नहीं कहा है कि उन्होंने शिवसेना (उबाठा) छोड़ दी है, लेकिन वे पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे व्हिप का उल्लंघन हुआ।

दिल्ली में 17 जून को हुई शिवसेना (उबाठा) के संसदीय दल की बैठक में जो सांसद नहीं पहुंचे उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-आष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। इससे यह अटकलें तेज हो गईं कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं।

शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्य हैं और बागी गुट को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों (यानी कुल संख्या का दो-तिहाई) की जरूरत है।

इस बीच, महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने टिप्पणी की कि अब इंतजार करने और यह देखने का समय है कि प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई की टीम कब राउत के पास पहुंचती हैं।

मंत्री की यह टिप्पणी राउत के हालिया बयान के जवाब में थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) उनके नियंत्रण में हो, तो महाजन दल बदलने वाले पहले भाजपा नेता होंगे।

पलटवार करते हुए राउत ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का इंतजार करने में कोई खराबी नहीं है।

राउत ने आरोप लगाया, ‘‘केंद्रीय एजेंसियों को मेरे घर इसलिए भेजा गया है, क्योंकि वे आपके घरेलू नौकर हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब ईडी और सीबीआई आपके घर पहुंचेंगी, तो आप या तो किसी बिल में छिप जाएंगे या आत्महत्या कर लेंगे या फिर पार्टी बदल लेंगे।’’

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप