मुंबई, 23 जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा कि विदेशी मुद्रा प्रवासी जमा (एफसीएनआर) के लिए अदला-बदली सुविधा एक साधारण विदेशी मुद्रा अदला-बदली है लेकिन इसमें केवल मूल राशि शामिल है, ब्याज नहीं।
केंद्रीय बैंक ने एफसीएनआर (बैंक) जमा, विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा उधारी के बारे में ‘अक्सर पूछे जाने वाले सवालों’ (एफएक्यू) की सूची जारी करते हुए यह जानकारी दी।
आरबीआई ने कहा कि बैंक एफसीएनआर (बी) खाताधारकों को ऋण दे सकते हैं और इन जमाओं को ऋण के बदले गिरवी भी रख सकते हैं।
रिजर्व बैंक ने बैंकों को बिना जोखिम के नए एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने में मदद के लिए आठ जून को विशेष डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा अदला-बदली योजना शुरू की थी। इसका मकसद विदेशी पूंजी आकर्षित करना है।
इस योजना के तहत बैंकों को तीन से पांच वर्ष की अवधि वाले एफसीएनआर (बी) जमा पर अधिक ब्याज दर देने की मंजूरी दी गई है।
आरबीआई ने कहा, “रिजर्व बैंक प्राप्त जमा के लिए विदेशी मुद्रा अदला-बदली उपलब्ध कराएगा। यह एक साधारण खरीद/बिक्री विदेशी मुद्रा अदला-बदली है, जो केवल मूल राशि को कवर करता है, ब्याज घटक को नहीं।”
एफएक्यू के अनुसार, बैंक तीन वर्ष से कम अवधि के लिए भी मुद्रा अदला-बदली कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए न्यूनतम तीन वर्ष की मूल अवधि वाले नए पात्र एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने अनिवार्य होंगे।
केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के तीन वर्ष या उससे अधिक औसत परिपक्वता वाले बाह्य वाणिज्यिक उधारी के लिए भी डॉलर-रुपया अदला-बदली सुविधा शुरू की है। इसकी अवधि उधार की परिपक्वता या पुनर्भुगतान अनुसूची के अनुरूप होगी, जिसकी अधिकतम अवधि पांच वर्ष होगी।
इसके अलावा, अधिकृत डीलर श्रेणी-1 बैंकों द्वारा जुटाए गए न्यूनतम तीन वर्ष की परिपक्वता वाले विदेशी मुद्रा उधार के लिए भी यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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