नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) वित्त मंत्रालय ने वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के मकसद से सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर संगठित ऋण प्रणाली से बाहर रह गए व्यक्तियों को बैंकिंग ऋण ढांचे में लाने की रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर चर्चा की।
वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए वित्तीय समावेश 2.0 के लिए खाका तैयार करने पर विचार-विमर्श किया।
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बयान में कहा कि बैठक में उपस्थित सभी पक्षों की सक्रिय भागीदारी के साथ विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
चर्चा का मुख्य केंद्र वित्तीय समावेश को आगे बढ़ाने के लिए एक योजना दस्तावेज तैयार करना था, जिसमें सभी नागरिकों के लिए बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच, गांवों में बैंकिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार, विशेष रूप से महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए औपचारिक ऋण की उपलब्धता और 2047 तक सभी नागरिकों के लिए बीमा और पेंशन के लक्ष्य को प्राप्त करना जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल थे।
इसके अलावा, बैठक में नवोन्मेषी डिजिटल और वित्तीय उत्पादों के विकास, विशेष रूप से ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन की पहुंच बढ़ाने, डिजिटल सहित वित्तीय धोखाधड़ी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वयस्कों के साथ-साथ माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के छात्रों को वित्तीय और डिजिटल साक्षरता प्रदान करने पर भी चर्चा हुई।
नागराजू ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रत्येक अनुमंडल में कम से कम एक बैंक शाखा होने, सभी नागरिकों के लिए बीमा और पेंशन दायरा बढ़ाने और औपचारिक ऋण प्रणाली से बाहर रह गए व्यक्तियों को बैंक ऋण ढांचे में लाने के लिए रणनीति तैयार करने जैसे उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
, देश में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए इस चर्चा को और आगे के विचार-विमर्श के आधार पर एक अंतिम रिपोर्ट जल्द ही जारी की जाएगी।
भाषा रमण अजय
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