शह मात The Big Debate/Image Credit: IBC24 File Photo
शह मात The Big Debate: भोपाल: एमपी में कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे को लेकर एक बार फिर से कांग्रेस-बीजेपी में जंग छिड़ी है। दरअसल, सागर की बीना विधानसभा सीट से 2023 में विधायक बनीं निर्मला सप्रे का 2024 आते-आते कांग्रेस से मोहभंग हो गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में सागर जिले के राहतगढ़ में सीएम मोहन यादव की सभा के दौरान निर्मला सप्रे बीजेपी के मंंच पर नजर आईं।.बीजेपी की जीत का परचम बुलंद किया.. फिर वो कांग्रेस से इस्तीफा दिए बिना बीजेपी की मीटिंग्स और बीजेपी नेताओं के साथ नजर आने लगीं। कांग्रेस ने इसके खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा।
दलबदल कानून के तहत कार्रवाई करने और सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन दिया। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा अभी हाल ही में 15 जनवरी को हाईकोर्ट ने सुनवाई की और कार्रवाई की गेंद, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के पाले में डाल दी। मंगलवार को नरेंद्र सिंह तोमर ने नेताप्रतिपक्ष उमंग सिंघार और संबंधित पक्षों के साथ मीटिंग की। सिंघार जल्द कार्रवाई होने के साथ आरोप लगा रहे हैं कि, बीजेपी बीना में उपचुनाव से डर रही है। कोर्ट को गुमराह कर रही है। तो विधानसभा अध्यक्ष ने सुनवाई की बातें सार्वजनिक ना करने की बात कही।
कुलमिलाकर निर्मला सप्रे की विधायकी को लेकर एमपी में सियासी शमशीरें खिंची हुई हैं। कांग्रेस जहां दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर रही है, उपचुनाव में उतरने के लिए ताल ठोंक रही है, तो बीजेपी किसी ना किसी तरह निर्मला सप्रे के मामले को 2028 के चुनाव तक खींच रही है। क्योंकि विजयपुर में रामनिवास रावत की हार के बाद बीजेपी रिस्क लेने से बच रही है। ऐसे में सवाल ये कि- अगर बीजेपी ने निर्मला सप्रे को पार्टी में शामिल करा लिया है तो फिर औपचारिक तौर पर स्वीकार करने से क्यों कतरा रही है? सवाल ये कि क्या हाईकोर्ट के दखल के बाद निर्मला सप्रे को विधायक की कुर्सी गवांनी पड़ जाएगी?
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