नई दिल्लीः Vande Bharat: इस बार के बजट सत्र में बजट से ज्यादा नेताओं की आपसी खींचतान ज्यादा सुर्खियों में है। लोकसभा में नेता विपक्ष के निशाने पर सीधे-सीधे देस की सरकार और प्रधानमंत्री हैं। नरवणे की अनपब्लिश बुक के बाद अब बहस में एपस्टीन फाइल्स है। राहुल गांधी का दावा है कि इंडो-अमेरिका ट्रेड डील के पीछे वहां अडाणी पर चल रहा केस है, जिसका सीधा-सीधा असर और दबाव PM मोदी पर है। जाहिर है बयान पर सत्ता पक्ष की भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि अडाणी समूह से जुड़ा अमेरिका में चल रहा मामला केवल कारोबारी मुद्दा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री पर दबाव बनाने का एक माध्यम है। राहुल ने कहा कि ये सिर्फ प्रधानमंत्री का आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि 150 करोड़ भारतीयों के भविष्य का आत्मसमर्पण है, उनके मुताबिक प्रधानमंत्री भाजपा की वित्तीय संरचना की रक्षा के लिए फैसले ले रहे हैं।
राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों को प्रमाणित करना जरूरी है..जिसका राहुल ने जवाब भी दिया। राहुल गांधी ने ये भी दावा किया कि अमेरिका के न्याय विभाग के पास एपस्टीन मामलों से जुड़ी फाइलें हैं, जिनमें हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम शामिल हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी राहुल गांधी के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में डेटा संरक्षण अधिनियम के तहत संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहती है और आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि जरूरी है। राहुल गांधी के आरोपों और सरकार की प्रतिक्रिया के बीच ये मुद्दा अब सियासी तकरार का नया केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में संसद और बाहर दोनों जगह इस पर बहस तेज होने की संभावना है।