Mumbai Melody Road India : मुंबई में अब सड़कें गाएंगी गाना! कार की रफ्तार के साथ गूंजेगी “जय हो” की धुन, देखें भारत की पहली मेलोडी रोड

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मुंबई की कोस्टल रोड पर 500 मीटर लंबी म्यूजिकल सड़क बनाई गई है। 70-80 किमी/घंटा की स्पीड पर गाड़ी चलाते ही ऑस्कर जीतने वाला गाना "जय हो" सुनाई देता है।

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 12:06 AM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 12:11 AM IST

Mumbai Melody Road India / Image Source : X

HIGHLIGHTS
  • मुंबई की कोस्टल रोड पर म्यूजिकल सड़क बनी, गाड़ी चलाते ही सुनाई देगा "जय हो"।
  • सड़क पर कट लगाए गए हैं, और धुन केवल 70-80 किमी/घंटा की स्पीड पर सुनाई देती है।
  • सड़क बनाने में 6 करोड़ रुपये खर्च हुए और हंगरी की तकनीक का इस्तेमाल हुआ।

मुंबई : अब मुंबई की सड़क सिर्फ रास्ता ही नहीं दिखाएगी, बल्कि गाना भी सुनाएगी। मुंबई के ‘कोस्टल रोड’ पर भारत की पहली ‘मेलोडी रोड’ शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसका उद्घाटन किया। जब आप इस खास सड़क पर अपनी गाड़ी चलाएंगे, तो आपको ऑस्कर जीतने वाला गाना “जय हो” सुनाई देगा।

70 से 80 की स्पीड पर सुनाई देती है धुन

यह म्यूजिकल सड़क कोस्टल रोड पर नरीमन पॉइंट से वर्ली जाने वाले रास्ते पर बनाई गई है। यह करीब 500 मीटर यानी आधा किलोमीटर लंबी है। इसे बनाने के लिए सड़क पर छोटे-छोटे कट लगाए गए हैं। जब आपकी कार 70 से 80 की स्पीड पर इस हिस्से से गुजरती है, तो टायर और सड़क के टकराने से संगीत पैदा होता है। सुरक्षा के लिए बीएमसी ने पहले ही बोर्ड लगा दिए हैं ताकि लोग अपनी गाड़ी की स्पीड सही कर सकें और उन्हें गाना साफ सुनाई दे।

6 करोड़ रुपये की लगत से बनी सड़क

इस सड़क को बनाने में करीब 6 करोड़ रुपये का खर्च आया है और इसमें विदेशी (हंगरी) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे लोग एक फिक्स स्पीड पर गाड़ी चलाएंगे, जिससे एक्सीडेंट कम होंगे और ट्रैफिक भी सुधरेगा। दुनिया में ऐसी बहुत कम सड़कें हैं और भारत में यह पहली बार हुआ है। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो मुंबई की और भी सड़कों को इसी तरह “म्यूजिकल” बनाया जाएगा।

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म्यूजिकल सड़क कहां बनाई गई है?

नरीमन पॉइंट से वर्ली जाने वाले कोस्टल रोड पर

गाना सुनने के लिए कितनी स्पीड जरूरी है

70 से 80 किमी/घंटा की स्पीड पर गाना सही सुनाई देता है।

सड़क बनाने में कितना खर्च आया और तकनीक कैसी है?

लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च हुए, और इसमें हंगरी की तकनीक का इस्तेमाल किया गया।