(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए भारत के पास पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश है।
रिजर्व बैंक गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति बुधवार को मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगी। व्यापक रूप से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आरबीआई यथास्थिति बनाये रखेगा। समिति की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हुई।
सीतारमण ने राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के एक कार्यक्रम में कहा कि यह साल पिछले वर्ष की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाला बड़ा झटका बन गया है और नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का संकेत दे रहा है।’’
सीतारमण ने कहा कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता और अस्पष्टता के दौर से गुजर रही है, जबकि दुनिया भर में सार्वजनिक ऋण भी तेजी से बढ़ा है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि कर्ज प्रबंधन के मामले में भारत का प्रदर्शन बेहतर है। कुल ऋण-जीडीपी अनुपात 81 प्रतिशत है, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश राजकोषीय सूझ-बूझ बनाए रखने में विफल रहने के कारण चुनौतियों से निपटने के लिए सीमित राजकोषीय संसाधनों की समस्या का सामना कर रहे हैं।
सीतारमण ने कहा कि इसके उलट, ‘‘भारत के पास राजकोषीय संसाधन हैं। पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को जारी रखने की गुंजाइश है, आरबीआई के पास ब्याज दरें कम करने की गुंजाइश है और प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित सहायता प्रदान करने की क्षमता है। यह एक दशक के राजकोषीय सूझ-बूझ और अनुशासन का परिणाम है।’’
उन्होंने कहा कि राजकोषीय गुंजाइश को देखते हुए ही भारत ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम किया और पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती कीमतों से आम आदमी को बचाने के लिए प्रमुख पेट्रोरसायन उत्पादों पर सीमा शुल्क से छूट दी।
भाषा योगेश रमण
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