Fuel Price Decrease in India: '20 रुपए प्रति लीटर सस्ता होगा ईंधन...' केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी अहम जानकारी, जानिए क्या है सरकार की तैयारी / Image: AI Generated
नई दिल्ली: Fuel Price Decrease in India भारत में इन दिनों पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर सियासी गलियारों से लेकर आम आदमी तक बवाल मचा हुआ है। एथेनॉल से गाड़ियों के खराब होने की कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। हालांकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऐसी एक भी कार का नाम बताएं जिसमेंइथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के कारण कोई समस्या आई हो। वहीं, दूसरी ओर अब केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सरकार E85 फ्यूल लाने की योजना बना रही है। इस दौरान उन्होंने ये भी दावा किया है कि E85 पेट्रोल नॉर्मल पेट्रोल से 20 रुपए प्रति लीटर सस्ता होगा।
Fuel Price Decrease in India केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार E85 फ्यूल लाने की योजना बना रही है, जो स्टैंडर्ड E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग ₹20 प्रति लीटर सस्ता होगा। मंत्री ने कहा कि E85 का इस्तेमाल सिर्फ़ उन गाड़ियों में किया जा सकेगा जिन्हें खास तौर पर इस फ्यूल के इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि इस प्रस्तावित कदम का मकसद ग्राहकों को आर्थिक राहत देना और साथ ही सरकार के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को आगे बढ़ाना है। उन्होंने व्यापक बायोफ्यूल पॉलिसी का बचाव भी किया और इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से इंजन खराब होने और गाड़ी की परफॉर्मेंस पर असर पड़ने जैसी चिंताओं को खारिज कर दिया।
दूसरी ओर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि वे ऐसी एक भी कार का नाम बताएं जिसमें इस ईंधन के कारण कोई समस्या आई हो। ई20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथनॉल-मिश्रित ईंधन बिक्री की अनिवार्यता को लेकर आलोचना और गाड़ियों की माइलेज कम होने की शिकायतों के बीच उन्होंने यह बात कही। गडकरी ने यहां ‘विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते कहा कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल आदि) पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है। इसके कारण ईंधन आयात पर सालाना 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए भी खतरा है, इसलिए देश की प्रगति के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ई20 पेट्रोल के कारण किसी कार में समस्या आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। क्या देश में कोई ऐसी कार है जिसमें ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई समस्या आई हो? बस एक का नाम बताइए।’’ गडकरी ने कहा, ‘‘…ज़्यादा एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही हैं। पैसा देकर यह अभियान चलाया जा रहा है।’’ भारत ने पहले ही 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। एथनॉल गन्ना, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बनता है।
भारत में वाहन मालिकों के पास पेट्रोल पंप पर अलग-अलग तरह के ईंधन चुनने का विकल्प नहीं होता, जबकि ब्राजील में ग्राहकों को अलग-अलग कीमतों वाले ईंधन चुनने का विकल्प मिलता है। ब्राजील के कानून के तहत, अधिक एथनॉल वाले मिश्रण के लिए कीमत में छूट देनी होती है। इस आरोप पर कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथनॉल बनाने के काम में शामिल हैं और इसीलिए वह अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल को लाने पर जोर दे रहे हैं, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें हैं और उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल की अधिकता है इसलिए मक्के से एथनॉल बनाने के कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। गडकरी ने कहा, ‘‘जब हमने मक्के से एथनॉल बनाने का फैसला किया, तो मक्के की बाजार कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी और न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इस फैसले के बाद, मक्के की कीमत बढ़कर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये आए।’’ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अधिक एथनॉल मिश्रित और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने के लिए वाहन उत्सर्जन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है ताकि सभी तरह के वाहनों के लिए ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ और पूरी तरह से जैव ईंधन से चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ हो सके।
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