नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बुधवार को कहा कि अमेरिका में उनके खिलाफ आपराधिक मामला खारिज होने से उन्हें जीत का अहसास नहीं, बल्कि विनम्रता का अनुभव हुआ है।
अदाणी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने कानून के शासन में उनके विश्वास को और मजबूत किया है तथा कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और वादों पर कायम रहने का महत्व सिखाया है।
अदाणी ने कर्मचारियों और साझेदारों के साथ संवाद कार्यक्रम ‘अपनी बात, अपनों के साथ’ के दूसरे संस्करण में 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और उसके बाद अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से दर्ज मामले पर विस्तार से बात की। यह कार्यक्रम न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत द्वारा अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज किए जाने के बाद आयोजित हुआ।
समूह की ओर से जारी बयान के अनुसार, अदाणी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने उनके इस विश्वास को और मजबूत किया कि स्थायी विश्वास अपने वादों को निभाने, मूल्यों पर अडिग रहने और कठिन समय में भी सही काम करने से अर्जित होता है।
उन्होंने 2023 में समूह द्वारा 20,000 करोड़ रुपये के अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) को पूर्ण अभिदान मिलने के बावजूद वापस लेने के फैसले को याद करते हुए कहा, ‘‘विश्वास किसी भी कानूनी अधिकार से बड़ा होता है।’’
उन्होंने कहा कि कानून अधिकार देता है, लेकिन यह मूल्य ही तय करते हैं कि उन अधिकारों का इस्तेमाल कब किया जाना चाहिए।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने 2023 में शेयर मूल्य में हेराफेरी, विदेशी कर पनाहगाहों के कथित अनुचित इस्तेमाल और अत्यधिक कर्ज से जुड़े आरोप लगाए थे। इसके बाद अदाणी समूह ने अपना एफपीओ वापस ले लिया था। समूह ने इन आरोपों को खारिज किया था।
इसके बाद नवंबर, 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने अदाणी और अन्य पर भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के ठेके हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को लगभग 26.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की साजिश रचने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। अदाणी और समूह ने इन आरोपों से भी इनकार किया था।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गैरॉफिस ने न्याय विभाग की ओर से मामला वापस लेने का अनुरोध स्वीकार करते हुए आपराधिक आरोप खारिज कर दिए।
अदाणी ने कहा कि कानूनी कार्यवाही के दौरान भी समूह ने अपने कारोबार पर पूरा ध्यान बनाए रखा और कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं, ठेकेदारों, विक्रेताओं तथा अन्य साझेदारों ने अपने दायित्वों का निर्वहन जारी रखा।
उन्होंने कहा, ‘‘जब सार्वजनिक ध्यान कानूनी कार्यवाही पर केंद्रित था, तब भी कर्मचारियों, श्रमिकों, आपूर्तिकर्ताओं, ठेकेदारों, विक्रेताओं और साझेदारों ने चुपचाप कारोबार को आगे बढ़ाया, ग्राहकों की सेवा की और अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाया। उनकी अटूट निष्ठा ने समूह के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर को सबसे मजबूत वृद्धि के दौर में बदलने में मदद की।’’
अदाणी ने कहा कि इस पूरे अनुभव ने लोगों पर उनका भरोसा और मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि देशभर में कई ऐसे लोगों ने भी उनका उत्साह बढ़ाया और समर्थन दिया, जिनसे उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि समूह की आलोचना को भी आत्ममंथन और सुधार के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन लोगों का भी आभारी हूं जिन्होंने समूह पर सवाल उठाए और आलोचना की। किसी भी मंशा से की गई आलोचना आत्ममंथन और सुधार का अवसर देती है।’’
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों का उल्लेख करते हुए अदाणी ने कानूनी विवाद से आगे बढ़कर देश के दीर्घकालिक विकास पर जोर दिया।
उन्होंने अदाणी परिवार के तीन लाख से अधिक कर्मचारियों और साझेदारों से पूछा कि उनकी पीढ़ी देश के लिए कैसी विरासत छोड़कर जाएगी।
समूह के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि ‘‘विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते देश के बीच हर कर्मचारी और साझेदार को खुद से एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण सवाल पूछना चाहिए कि हमारी पीढ़ी को किस बात के लिए याद रखा जाएगा।’’
अदाणी ने कहा कि किशोरावस्था में अवसरों की तलाश में घर छोड़ने से लेकर अब तक के जीवन के अनुभवों ने उन्हें ईमानदारी, विनम्रता और दृढ़ता का महत्व सिखाया है।
समूह के अनुसार, उन्होंने कहा कि ‘‘चरित्र एक बिना तराशे हीरे की तरह होता है, जिसकी असली चमक केवल धैर्य, अनुभव और विपरीत परिस्थितियों से सामने आती है।’’
उन्होंने समुद्र मंथन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियां चरित्र का निर्माण नहीं करतीं, बल्कि उसे उजागर करती हैं।
उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग के आरोपों और अमेरिका की कानूनी कार्यवाही ने समूह के धैर्य, न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान और कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य पर केंद्रित रहने की क्षमता की परीक्षा ली।
अदाणी ने खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क में चल रहे कार्य और वहां युवा इंजीनियर अमित कुमार के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास का अर्थ केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं है, बल्कि उससे पैदा होने वाली उम्मीद, लोगों के सम्मान की पुनर्स्थापना और उनके जीवन में आने वाले बदलाव भी हैं।
उन्होंने कर्मचारियों और साझेदारों से ऐसे संस्थान बनाने का आह्वान किया जो अपने संस्थापकों के बाद भी लंबे समय तक कायम रहें।
अदाणी ने कहा कि लक्ष्य केवल विश्वस्तरीय कारोबार खड़ा करना नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान बनाना है जो व्यक्तियों से आगे बढ़कर अवसरों का विस्तार करें, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दें और विकसित भारत के साझा लक्ष्य को साकार करने में मदद करें।
भाषा योगेश अजय
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