मुंबई, 13 फरवरी (भाषा) वैश्विक व्यापार की प्रतिकूल परिस्थिति और खास बाजारों में शुल्क संबंधी दबाव के बीच, भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात जनवरी में सालाना आधार पर 5.79 प्रतिशत घटकर 223.85 करोड़ डॉलर रह गया। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
जीजेईपीसी ने एक बयान में कहा कि पिछले साल की समान अवधि, जनवरी 2025 में कुल निर्यात 237.60 करोड़ डॉलर का हुआ था।
हालांकि, अप्रैल 2025-जनवरी 2026 के दौरान कुल निर्यात स्थिर रहा, जो पिछले साल इसी समय के 2333.47 करोड़ डॉलर के निर्यात के मुकाबले 0.64 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2318.58 करोड़ डॉलर रहा।
निर्यात के नतीजों पर अमेरिका को होने वाले निर्यात में भारी कमी का काफी असर पड़ा, जो भारत का सबसे बड़ा रत्न एवं आभूषण का निर्यात गंतव्य है। वहां ज्यादा शुल्क और मूल्य में कमी के कारण निर्यात में 45 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई।
इस बीच, भारत ने अपने निर्यात बाजारों को सफलतापूर्वक विविधीकृत किया है और अप्रैल 2025 – जनवरी 2026 के दौरान, संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात 23.71 प्रतिशत बढ़ा, हांगकांग को निर्यात 33.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस में 36 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूत वृद्धि हुई।
बेल्जियम, थाईलैंड और इजराइल जैसे दूसरे बाजारों में भी दहाई अंक में वृद्धि दर्ज की गई, जिससे भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और बदलते व्यापार के हिसाब से उद्योग को स्वयं को ढालने की क्षमता का पता चलता है।
जीजेईपीसी के अध्यक्ष, किरीट भंसाली ने कहा, ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रारूप की घोषणा से बहुत जरूरी राहत मिली है। आभूषण पर संशोधित 18 प्रतिशत शुल्क तथा हीरे और रंगीन पत्थरों पर शून्य शुल्क हीरा, रंगीन पत्थर और जड़ाऊ स्वर्ण आभूषण में मुख्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले भारत को संरचनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में रखेगा।’’
भाषा राजेश राजेश रमण
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