मुंबई, 13 फरवरी (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के 28 जनवरी को बारामती में विमान दुर्घटना में हुए निधन के घटनाक्रम का राजनीतिकरण करने के प्रयास को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रोहित पवार द्वारा चार्टर्ड विमान दुर्घटना के संबंध में कई सवाल उठाये जाने के दो दिन बाद राकांपा के मुख्य प्रवक्ता आनंद परंजपे ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
उन्होंने कहा कि राकंपा 27 जनवरी की घटना का राजनीतिकरण करने के प्रयासों को खारिज करती है लेकिन 28 जनवरी की घटनाओं से संबंधित सवालों की जांच होनी चाहिए।
रोहित पवार ने एक ‘प्रस्तुति’ के दौरान दावा किया था कि ‘पूर्वी विदर्भ’ के एक नेता ने 27 जनवरी को अजित पवार से किसी काम के सिलसिले में मुलाकात की थी, जिसके कारण उन्हें (अजित को) बारामती जाने की अपनी सड़क यात्रा की योजना बदलनी पड़ी और अगली सुबह चार्टर्ड फ्लाइट लेनी पड़ी।
परंजपे ने कहा, “परिवार का मतलब सिर्फ खून के रिश्ता नहीं होता बल्कि इसमें वे लोग भी शामिल होते हैं जो दो जुलाई, 2023 को अजित पवार के अलग राजनीतिक रुख अपनाने के बाद उनके साथ खड़े रहे।”
उन्होंने अजित गुट के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के फैसले का जिक्र किया।
प्रवक्ता ने कहा कि कुछ नेताओं के हालिया बयानों से दिवंगत नेता के परिवार व समर्थकों को ठेस पहुंची है और ये महाराष्ट्र की संस्कृति के अनुरूप नहीं हैं।
गौरतलब है कि जहां रोहित पवार समेत राकांपा (शप) के नेता दावा कर रहे हैं कि अजित पवार पार्टी को एकजुट करने के इच्छुक थे और उनकी मृत्यु से पहले इस संबंध में बातचीत हो रही थी, वहीं राकांपा नेताओं ने संकेत दिया कि वह इस प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं।
परंजपे ने कहा कि राकांपा पहले दिन से ही विमान दुर्घटना की गहन जांच की मांग कर रही है और सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए, जिसमें यह दुर्घटना थी या साजिश, चालक दल में अंतिम समय में संभावित बदलाव और विमान से संबंधित तकनीकी समस्याएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र विधानसभा में चुने जाने के बाद जल्द ही पार्टी विधायकों से मुलाकात करेंगी और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेंगी।
28 जनवरी को बारामती में हुई दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया था जबकि हादसे में चार अन्य लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी।
भाषा जितेंद्र पवनेश
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