पश्चिम एशिया संकट, कमजोर मानसून देश की वृद्धि के लिए जोखिमः आरबीआई गवर्नर

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पश्चिम एशिया संकट, कमजोर मानसून देश की वृद्धि के लिए जोखिमः आरबीआई गवर्नर

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 05:32 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 05:32 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट और कमजोर मानसून की आशंका आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण जोखिम हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि मजबूत व्यापक आर्थिक आधार के चलते भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर दर्ज की है।

मल्होत्रा ने ‘डीडी न्यूज’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि पिछले वित्त वर्ष में देश की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए आरबीआई ने विभिन्न चुनौतियों के बावजूद 6.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है।

उन्होंने कहा, “मौद्रिक और राजकोषीय नीतियां मजबूत हैं, जिसके कारण हमारी वृद्धि दर उच्च बनी हुई है।”

मुद्रास्फीति पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई जबकि खाद्य मुद्रास्फीति 5.32 प्रतिशत रही।

आरबीआई गवर्नर ने मानसून को एक अन्य जोखिम कारक बताते हुए कहा कि देश की एक बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 17 प्रतिशत योगदान है, इसलिए मानसून की स्थिति पर नजर बनाए रखना होगा।

रुपये में गिरावट पर उन्होंने कहा कि मजबूत डॉलर और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अन्य देशों की तुलना में भारतीय मुद्रा का प्रदर्शन स्थिर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद डॉलर मजबूत हुआ है। कई देशों की मुद्राएं कमजोर पड़ी हैं। अगर हम वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय रुपये की स्थिति सामान्य मानी जा सकती है।’

मल्होत्र ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर कहा कि पिछले वर्ष सकल एफडीआई लगभग 95 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर रहा, जबकि चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में शुद्ध एफडीआई करीब सात अरब डॉलर रहा है।

मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति पर नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए वृद्धि को भी समर्थन देता रहेगा। उन्होंने कहा, “कम और स्थिर महंगाई टिकाऊ वृद्धि की आधारशिला है।”

ऋण वृद्धि के बारे में उन्होंने कहा कि जून में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर करीब 18 प्रतिशत रही, जो मई के 17.5 प्रतिशत से अधिक है।

कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग पर उन्होंने कहा कि आरबीआई ने बैंकों को ग्राहक सेवा बेहतर करने, लागत घटाने और निर्णय क्षमता बढ़ाने के लिए इसका उपयोग बढ़ाने की सलाह दी। साथ ही साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता पर सतर्क रहने को कहा है।

मल्होत्रा ने हफ्ते की शुरुआत में सार्वजनिक एवं चुनिंदा निजी बैंकों के प्रबंध निदेशकों एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक में भी एआई जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने के लिए कहा था।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण