नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) भारतीय वाहन क्षेत्र में वर्ष 2026 की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान हुए सौदों का कुल मूल्य 71.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले तीन साल का सबसे कम तिमाही लेनदेन है। सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की नवीनतम ‘ऑटोमोटिव डीलट्रैकर’ रिपोर्ट में कहा गया है कि जून तिमाही के दौरान वाहन क्षेत्र में कुल 20 सौदे हुए। हालांकि, सौदों की संख्या घटने के बावजूद सौदों का कुल मूल्य अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा।
तिमाही आधार पर कुल सौदा मूल्य में चार प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। इसका बड़ा हिस्सा मुख्य रूप में परिवहन मंचों, वाहन प्रौद्योगिकी एवं पूंजी बाजार से जुड़े निवेश में केंद्रित रहा।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के साझेदार और वाहन एवं इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र के प्रमुख साकेत मेहरा ने कहा, “तिमाही के दौरान सौदों की संख्या में कमी आई, लेकिन निवेश उन कंपनियों पर केंद्रित रहा जो भविष्य के परिवहन परिदृश्य को आगे बढ़ा रही हैं।”
रिपोर्ट के मुताबिक, पूंजी बाजार गतिविधियों को छोड़कर, इस क्षेत्र में 18 विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) और निजी इक्विटी (पीई) एवं उद्यम पूंजी (वीसी) सौदे हुए, जिनका कुल मूल्य 47.9 करोड़ डॉलर रहा।
इस दौरान एमएंडए गतिविधियां सीमित रहीं और पांच सौदों के जरिये 13.8 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ। इस तिमाही का सबसे बड़ा सौदा केपीआईटी टेक्नोलॉजीज द्वारा इजराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी साइमोटिव टेक्नोलॉजीज का 12 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण रहा।
पीई/वीसी निवेश में भी नरमी देखी गई और 13 सौदों के जरिये 34.1 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ। इसमें रैपिडो द्वारा 24 करोड़ डॉलर का वित्तपोषण सबसे बड़ा रहा, जबकि जेबीएम इकोलाइफ मोबिलिटी को 4.7 करोड़ डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, सौदों की संख्या घटने के बावजूद औसत सौदे का आकार बढ़ा है, जो उच्च मूल्य और प्रौद्योगिकी आधारित निवेश पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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