RBI Repo Rate Survey: आम जनता को लगने वाला है महंगाई का एक और झटका? रेपो रेट को लेकर सामने आई बड़ी जानकारी, सुनकर आपको भी लगेगा झटका

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RBI Repo Rate Survey; भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को यथावत रख सकता है।

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 07:07 PM IST

RBI Repo Rate Survey/Image Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • RBI जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को यथावत रख सकता है।
  • यह आकलन अर्थशास्त्रियों और क्षेत्र प्रमुखों के एक सर्वेक्षण में सामने आया है।
  • मौद्रिक समीक्षा बैठक में दरों को यथावत रखने की उम्मीद जताई।

RBI Repo Rate Survey: मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को यथावत रख सकता है। यह आकलन अर्थशास्त्रियों और क्षेत्र प्रमुखों के एक सर्वेक्षण में सामने आया है। अधिकतर उत्तरदाताओं का मानना है कि बढ़ते मुद्रास्फीतिक जोखिमों के बीच केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2026-27 में बाद में फिर से नीतिगत सख्ती शुरू कर सकता है। सर्वेक्षण में शामिल 11 उत्तरदाताओं ने आगामी (जिसकी घोषणा शुक्रवार को होनी है) मौद्रिक समीक्षा बैठक में दरों को यथावत रखने की उम्मीद जताई, जबकि चार ने 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है।

क्या कहा अर्थशास्त्रियों ने

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा, ‘‘ दर यथावत बनाए रखने की जरूरत इसलिए है क्योंकि कुल मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। ईंधन कीमतों में वृद्धि के मुद्रास्फीति पर दूसरे चरण के प्रभाव को देखने के लिए आरबीआई के पास नीतिगत गुंजाइश है। मुद्रास्फीति लक्ष्य आपूर्ति-पक्ष के झटकों के पहले दौर के प्रभाव को नजरअंदाज करने की अनुमति देता है।’’ (RBI Repo Rate Survey) मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक तीन से पांच जून के बीच होगी। इसमें नीतिगत दरों पर निर्णय लिया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने पिछले वर्ष से अब तक वृद्धि को समर्थन देने के लिए रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। अर्थशास्त्रियों ने निकट अवधि में विराम की संभावना को ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रभाव का आकलन करने की आरबीआई की प्राथमिकता से जोड़ा।

इसी महीने हो सकती है बढ़ोतरी

RBI Repo Rate Survey:  स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (इंडिया) में भारत आर्थिक अनुसंधान प्रमुख अनुभूति सहाय ने कहा, ‘‘ अब हमारा मानना है कि, एमपीसी जून की बैठक से ही दरों में बढ़ोतरी शुरू कर सकती है, क्योंकि घरेलू मुद्रास्फीति जोखिम बढ़ रहे हैं और वैश्विक प्रतिफल भी ऊंचे हैं। कुछ एशियाई केंद्रीय बैंकों ने पहले ही अप्रत्याशित दर बढ़ोतरी की है। (RBI Repo Rate Survey) यदि जिंस कीमतों और रुपये पर दबाव बना रहता है तो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हमारी दर वृद्धि का अनुमान 0.25 से 0.50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।’’

सर्वेक्षण से यह भी संकेत मिला कि आरबीआई आगामी नीतिगत समीक्षा में अपने मुद्रास्फीति अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित कर सकता है। अधिकतर उत्तरदाताओं का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान लगभग 4.9 से 5.5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों में हालिया बढ़ोतरी है।

पांच प्रतिशत तक बढ़ सकती है मुद्रास्फीति

RBI Repo Rate Survey:  रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जून में मुद्रास्फीति लगभग पांच प्रतिशत तक बढ़ सकती है, क्योंकि ईंधन की ऊंची कीमतें उपभोक्ता कीमतों में शामिल होने लगेंगी। हालांकि, दूसरे चरण के प्रभाव की सीमा अभी अनिश्चित है। (RBI Repo Rate Survey) कई उत्तरदाताओं ने कहा कि केंद्रीय बैंक यह देखने के लिए इंतजार कर सकता है कि मुद्रास्फीति का प्रभाव अस्थायी रहता है या स्थायी।

नकदी के मामले में अधिकतर उत्तरदाताओं को जून की नीति में बड़े कदमों की उम्मीद नहीं है। हालांकि, उनका कहना है कि आरबीआई बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी बनाए रखने और ‘मनी मार्केट’ दरों को नीति दायरे के अनुरूप रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरा सकता है। कुछ उत्तरदाताओं का यह भी मानना है कि केंद्रीय बैंक रुपये और विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े प्रशासनिक एवं नियामकीय उपायों की समीक्षा कर सकता है, जबकि बाजार की सुव्यवस्थित स्थिति बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित रखेगा।

लार्सन एंड टुब्रो समूह के मुख्य अर्थशास्त्री सच्चिदानंद शुक्ल ने कहा, ‘‘ हम नकदी को समर्थन देने, ‘मनी मार्केट’ दरों को दायरे के अनुरूप बनाए रखने और रुपये से जुड़े प्रशासनिक व नियामकीय उपायों की समीक्षा की उम्मीद करते हैं।’’

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