दिवाला प्रक्रिया में देरी कम करने वाले सुझावों के लिए तैयारः आईबीबीआई प्रमुख

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दिवाला प्रक्रिया में देरी कम करने वाले सुझावों के लिए तैयारः आईबीबीआई प्रमुख

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  • Publish Date - September 16, 2023 / 06:15 PM IST,
    Updated On - September 16, 2023 / 06:15 PM IST

मुंबई, 16 सितंबर (भाषा) भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरमैन रवि मित्तल ने प्रक्रियागत विलंब को कम करने में मददगार उपायों के बारे में हितधारकों से सुझाव देने का शनिवार को अनुरोध किया।

मित्तल ने यहां उद्योग मंडल एसोचैम की तरफ से ‘दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) और मूल्यांकन’ पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘आईबीसी का प्रमुख उद्देश्य न केवल बकाया कर्ज की वसूली बल्कि पुनरुद्धार और पुनर्वास भी है। हमेशा इसकी संकल्पना एक समाधान व्यवस्था के रूप में की गई थी, न कि वसूली प्रणाली के रूप में।’

उन्होंने कहा, ‘यह कानून लाने का उद्देश्य कंपनी को पटरी पर वापस लाने का था। हालांकि आईबीसी का मूल्यांकन वसूली के आधार पर किया जाता है।’

आईबीबीआई चेयरमैन ने आईबीसी आने पर भी कर्ज वसूली में हो रही देरी औऱ कम वसूली पर जताई गई चिंताओं पर कहा, ‘हम प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश कर रहे हैं और हितधारकों के सुझावों को लेकर खुली सोच रखते हैं। आईबीसी का प्रत्यक्ष लाभ वसूली है लेकिन आप जानते हैं कि अप्रत्यक्ष लाभ कहीं बड़ा होता है और इसे व्यावहारिक परिवर्तन कहा जाता है। इसे कर्जदाता एवं कर्जदार के रिश्ते में बदलाव कहा जाता है।’

उन्होंने कहा कि पिछले साल राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने अधिकतम 180 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी थी और इनके जरिये बकाया कर्ज की 36 प्रतिशत वसूली हुई। उन्होंने कहा कि आईबीसी ने 2017 से अब तक 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली में मदद की है।

मित्तल ने कहा, ‘हमें देरी को कम करने के लिए अधिक नवोन्मेषी होना होगा। निश्चित रूप से, इसमें संशोधन की जरूरत है। अगर हम होने वाली देरी को कम करते हैं तो वसूली बेहतर होगी। अब एनसीएलटी एक महीने में 35 कर्ज समाधान योजनाओं को मंजूरी दे रहा है और इस रफ्तार से चलने पर निश्चित रूप से देरी में काफी कमी आएगी।’

उन्होंने कहा कि देरी आमतौर पर कर्ज समाधान योजना की मंजूरी के समय होती है। उन्होंने कहा, ‘हम विभिन्न स्तरों पर देरी के कारणों का पता लगाने या उनका विश्लेषण करने की कोशिश कर रहे हैं और प्रक्रियाओं में तेजी लाने की कोशिश कर रहे हैं।’

भाषा प्रेम प्रेम

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