नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) अपनी वर्ष 2047 की रूपरेखा के तहत फसल विविधीकरण को बढ़ावा देगा। इसके तहत चावल की खेती का रकबा 5.3-5.5 करोड़ हेक्टेयर तक सीमित किया जाएगा और गेहूं के रकबे में भी इसी तरह की कमी की योजना है, जबकि मक्का, पोषक अनाज, दालों और बागवानी फसलों के रकबे को बढ़ाया जाएगा।
आईसीएआर के महानिदेशक एम एल जाट ने कहा कि विविधीकरण योजना नीति आयोग के साथ सलाह-मशविरे से तैयार की गई है। इस और अन्य लक्ष्यों के लिए मांग-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर ने अपने प्रभागों और संस्थानों में 52 कार्यबल बनाए हैं, जिनमें से प्रत्येक एक तय ‘बदलाव के सिद्धांत’ ढांचे के तहत काम कर रहे हैं।
जाट ने बृहस्पतिवार को यहां आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि परिषद का लक्ष्य वर्ष 2047 तक कृषि उत्पादन को मौजूदा 1.3 अरब टन से बढ़ाकर 2.1 अरब टन, बागवानी उत्पादन को 36.97 करोड़ टन से 79.7 करोड़ टन, दूध उत्पादन को 24 करोड़ 78.7 लाख टन से 62.8 करोड़ टन, मत्स्य उत्पादन को 1.95 करोड़ टन से चार करोड़ टन और कृषि-वानिकी क्षेत्र को 2.84 करोड़ हेक्टेयर से पांच करोड़ हेक्टेयर तक बढ़ाना है।
रणनीतिक क्षेत्रों में सुधार पर भी ध्यान दिया जाएगा — खेती में मशीनीकरण, जो अभी 47 प्रतिशत है, उसे वर्ष 2047 तक 80 प्रतिशत से अधिक तक बढ़ाना होगा, जबकि पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता 35 प्रतिशत से बढ़कर 75 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए।
जाट ने कहा कि पानी के उपयोग की दक्षता को 40-80 प्रतिशत तक बढ़ाने और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान, जो अभी 20 प्रतिशत है, को शून्य तक लाने का लक्ष्य है।
रूपरेखा के अनुसार, किसानों की जरूरतों के हिसाब से सेवाओं की आपूर्ति को 100 प्रतिशत कवरेज तक बढ़ाया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि अन्य दीर्घकालिक प्राथमिकताओं में घरेलू उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता, भूमि क्षरण निरपेक्षता, शुद्ध शून्य उत्सर्जन कृषि और बेहतर पोषण परिणाम शामिल हैं।
जाट ने बताया कि आईसीएआर ने ‘हार्वेस्ट’ (हार्नेसिंग एग्री-फूड रिसर्च, वाइब्रेंट एक्सटेंशन एंड एजुकेशन फॉर साइंस-लेड ट्रांसफॉर्मेशन) नाम की एक नई एकीकृत योजना भी शुरू की है, जो आईसीएआर की मौजूदा आठ योजनाओं को एक ही रूपरेखा में मिलाती है।
जाट ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के बाद, आईसीएआर ने राज्यों के हिसाब से विज्ञान पर आधारित कृषि रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र और गोवा के बाद इस सप्ताह पश्चिम बंगाल की रूपरेखा पेश की गई।
पिछले साल के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए आईसीएआर ने कहा कि अनाज के उत्पादन में 1.9 करोड़ टन की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी कीमत 60,000 करोड़ रुपये है। वर्ष 2001 से वर्ष 2014-15 के बीच दर्ज की गई वृद्धि की तुलना में पिछले 12 साल में उत्पादन तीन गुना से ज़्यादा बढ़ा है।
12 साल में बागवानी उत्पादन में 9.7 करोड़ टन की बढ़ोतरी हुई, जिसमें पिछले साल हुई बढ़ोतरी की कीमत 20,000 करोड़ रुपये थी, जबकि डेयरी और पशुपालन क्षेत्र ने साल के दौरान 50,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया।
जाट ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से मछली पालन (फिशरीज) उत्पादन दोगुना हो गया है और पिछले साल इसमें 40,000 करोड़ रुपये का मूल्य जुड़ा।
उन्होंने बताया कि इन चारों क्षेत्र ने मिलकर पिछले साल 1,70,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिसमें से शोध का हिस्सा लगभग एक-तिहाई यानी करीब 55,000 करोड़ रुपये था।
क्षेत्रवार उपलब्धियों पर आईसीएआर ने कहा कि वर्ष 2025 में 34 फसलों की 386 किस्में जारी की गई, जिनमें 94 प्रतिशत मौसम के अनुकूल और 29 जैविक स्तर पर पोषण से समृद्ध किस्में शामिल थीं। बागवानी में, 57 फसलों की 117 किस्में जारी की गई।
अधिकारियों ने बताया कि पशुओं में खुरपका-मुंहपका बीमारी (एफएमडी) के मामलों में 85 प्रतिशत की कमी आई है और अफ्रीकन स्वाइन फीवर के लिए टीका जल्द ही जारी किया जाएगा।
आईसीएआर ने यह भी बताया कि पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं में 85 प्रतिशत की कमी आई, जिसे संसद में भी माना गया। साथ ही, संस्था ने कहा कि वर्ष 2021 से वर्ष 2025 के बीच उसके बौद्धिक संपदा पोर्टफोलियो में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
जाट ने बताया कि जून में चलाए गए ‘खेत बचाओ’ अभियान के तहत, 728 जिलों में 1,657 टीमों ने 1.31 लाख से ज़्यादा कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों के ज़रिये सीधे तौर पर एक करोड़ किसानों और मीडिया के माध्यम से पांच करोड़ और किसानों तक पहुंच बनाई गई।
आईसीएआर ने पिछले साल के लिए 99.73 प्रतिशत खर्च का उपयोग किया, जो अब तक का सबसे ज्यादा है।
इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्यमंत्री — भागीरथ चौधरी, रामनाथ ठाकुर और एस के सिंह बघेल — के साथ-साथ पशुपालन और डेयरी सचिव नरेश पाल गंगवार और नीति आयोग के सदस्य के वी राजू भी मौजूद थे।
भाषा राजेश राजेश अजय
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