नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) आयकर विभाग के वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) में अब करदाताओं की विदेशी परिसंपत्तियों और आय से संबंधित जानकारी भी दिखाई देगी, जो ‘स्वचालित सूचना आदान-प्रदान’ (एईओआई) व्यवस्था के तहत मिलती है। सरकारी सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि फिलहाल कैलेंडर वर्ष 2022, 2023 और 2024 से संबंधित प्राप्त जानकारी एआईएस में प्रदर्शित की जा चुकी है। वर्ष 2025 से संबधित जानकारी सितंबर या अक्टूबर, 2026 में प्राप्त होने के बाद एआईएस में जोड़ दी जाएगी।
भारत को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समझौतों और व्यवस्थाओं के तहत 100 से अधिक साझेदार न्याय-क्षेत्रों से अपने कर निवासियों से संबंधित वित्तीय जानकारी मिलती है। इसमें विदेशी बैंक खातों, संरक्षक खातों, कुछ वित्तीय निवेश, ब्याज, लाभांश और अन्य निर्दिष्ट आय से जुड़ी सूचनाएं शामिल हो सकती हैं।
अब तक करदाता आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर एआईएस के माध्यम से अपने पैन से जुड़ी घरेलू वित्तीय जानकारी देख सकते थे। इस तरह ब्याज आय, लाभांश, प्रतिभूति लेनदेन, म्यूचुअल फंड निवेश और संपत्ति सौदे से संबंधित जानकारी एक ही स्थान पर मिल जाती है।
सूत्रों ने कहा, ‘‘एईओआई ढांचे के तहत विदेशी परिसंपत्तियों और आय के बारे में मिलने वाली जानकारी को एआईएस में प्रदर्शित करने का उद्देश्य पात्र करदाताओं को अनुपालन में सुविधा देना है, न कि उनकी जांच करना।’’
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआईएस में दिखाई गई विदेशी जानकारी केवल उतनी ही है, जितनी विभाग को साझेदार देशों से प्राप्त हुई है और यह करदाता की विदेशी परिसंपत्तियों या आय का पूर्ण विवरण नहीं है।
ऐसी स्थिति में करदाताओं के लिए जरूरी है कि अपने आयकर रिटर्न में अनुसूची ‘एफए’ और ‘एफएसआई’ के तहत सभी विदेशी परिसंपत्तियों और विदेशी स्रोत की आय का सही और पूरा विवरण दें, चाहे वह एआईएस में दिखे या नहीं।
सूत्रों ने बताया कि एआईएस में उपलब्ध यह जानकारी संबंधित करदाता को ही उसके सुरक्षित लॉग-इन के माध्यम से उपलब्ध होगी।
इसके साथ ही, करदाताओं को इस सुविधा की जानकारी देने और आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरते समय विदेशी परिसंपत्तियों और आय का सही उल्लेख करने के लिए एसएमएस और ई-मेल भी भेजे जा रहे हैं।
सरकारी सूत्रों ने कहा, ‘‘यह पहल करदाताओं को अंतरराष्ट्रीय सूचना आदान-प्रदान ढांचे के तहत उपलब्ध जानकारी तक पहुंच देने और सटीक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए है, न कि जांच या छानबीन का माध्यम है।’’
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प्रेम अजय
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