भारत 2035 तक 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला बनाने का लक्ष्य रखे: नीति आयोग

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भारत 2035 तक 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला बनाने का लक्ष्य रखे: नीति आयोग

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 06:15 PM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 06:15 PM IST

नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) देश को 2035 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल भागीदारी तक सीमित रहने के बजाय नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का लक्ष्य रखना चाहिए और 120-150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला विकसित करनी चाहिए। नीति आयोग की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया।

‘भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजनाओं का जोखिम कम करने और निवेशकों का दीर्घकालिक भरोसा मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार को आवश्यक निवेश का कम-से-कम एक-तिहाई हिस्सा उपलब्ध कराना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया कि चिप विनिर्माण की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे से शामिल होने के बजाय भारत को अपनी अलग राह तय करनी चाहिए, जो रणनीतिक आत्मनिर्भरता, मजबूत परिवेश और वैश्विक अपरिहार्यता पर आधारित हो।

इसमें कहा गया, “2035 तक भारत को नेतृत्व और स्पष्ट उद्देश्य के साथ 120-150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला विकसित करने का लक्ष्य रखना चाहिए।”

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर परिवेश तैयार करने के लिए अगले एक दशक में डिजाइन, विनिर्माण, उन्नत पैकेजिंग, सामग्री और सहायक बुनियादी ढांचे में करीब 135-180 अरब डॉलर के संचयी निवेश की जरूरत होगी।

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत सरकार को आवश्यक निवेश का कम-से-कम एक-तिहाई हिस्सा उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि परियोजनाओं का जोखिम कम हो और निवेशकों का दीर्घकालिक भरोसा मजबूत हो।”

इसमें कहा गया, “परियोजनाओं का जोखिम कम करने और निवेशकों का दीर्घकालिक भरोसा मजबूत करने के लिए भारत सरकार को आवश्यक निवेश का कम-से-कम एक-तिहाई हिस्सा उपलब्ध कराना चाहिए।”

रिपोर्ट में कहा गया कि इससे बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित किया जा सकेगा। सार्वजनिक वित्तपोषण में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों, उन्नत पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण डिजाइन बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय सहायता के साथ-साथ नीति स्थिरता, भरोसेमंद प्रोत्साहन और पूरी मूल्य श्रृंखला में समन्वित क्रियान्वयन पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया कि देश के सेमीकंडक्टर के बाजार के वर्ष 2035 तक बढ़कर करीब 200 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, बढ़ती घरेलू मांग के बावजूद वर्तमान में इस मांग का लगभग 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। इससे न केवल भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जा रही है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने पर देश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर संकट का खतरा भी बना रहता है।

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिड़ी ने अपने संदेश में कहा कि ‘विकसित भारत’ के लिए सबसे बड़े रणनीतिक जोखिमों में से एक आयातित प्रौद्योगिकियों पर लगातार बढ़ती निर्भरता है।

उन्होंने कहा, ‘भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रौद्योगिकी संप्रभुता सबसे बुनियादी जरूरत है। सेमीकंडक्टर इस नींव के केंद्र में हैं, जो एआई (कृत्रिम मेधा), रक्षा, विनिर्माण, दूरसंचार, परिवहन और नागरिक सेवाओं तक सब कुछ संचालित करते हैं।’

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 2014 और 2024 के बीच 6.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है और अगले 5 से 10 वर्षों में इसके 8.5 प्रतिशत की उच्च दर से बढ़ने की उम्मीद है।

भाषा योगेश रमण

रमण