नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) रूसी तेल एवं गैस के भारत, चीन समेत बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान करने वाले विधेयक को अमेरिकी सीनेट में मंजूरी दिए जाने के बीच भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक अब निचले सदन प्रतिनिधि सभा में विचार के लिए जाएगा। प्रस्तावित कानून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर कड़े व्यापारिक शुल्क लगाने का अधिकार देगा, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल एवं गैस का आयात करते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत का रुख कई बार स्पष्ट किया जा चुका है। यह हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को विविध स्रोतों के जरिए पूरा करने पर आधारित है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है।”
उन्होंने बताया कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के संबंधित हितधारकों के साथ विभिन्न स्तरों पर संवाद बनाए हुए है।
सीनेटर लिंडसे ओ ग्राहम की पहल पर लाया गया यह विधेयक रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस का समर्थन करने वाले तत्वों पर प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है। इसके तहत रूसी अधिकारियों, उद्योगपतियों, उनके परिवारों, बैंकों और ‘रूसी शैडो फ्लीट’ को निशाना बनाया गया है।
विधेयक की धारा 113 के तहत उन पांच देशों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है, जो रूसी ईंधन के सबसे बड़े खरीदार हैं या प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। इसमें भारत और चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) हर 180 दिन में इन देशों की सूची की समीक्षा करेगा और उनके आयात व्यवहार के आधार पर शुल्क दरों में बदलाव किया जा सकता है।
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