नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के पहले दिन भारत ने ब्रिटेन को 14 करोड़ डॉलर का शून्य-शुल्क पर निर्यात किया है।
अग्रवाल ने इसे दो बड़ी और एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी समझौता बताते हुए कहा कि यह भारत के अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों में से एक है।
उन्होंने कहा कि इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 14 दौर की औपचारिक वार्ताओं में 800 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
सीईटीए के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य-शुल्क पहुंच मिली है। इनमें चमड़ा, जूते, वस्त्र, मशीनरी, प्लास्टिक, धातु, समुद्री उत्पाद और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें पहले दो से 16 प्रतिशत तक आयात शुल्क का सामना करना पड़ता था।
सरकारी खरीद के प्रावधानों के तहत भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के करीब 90 अरब पाउंड के सरकारी खरीद बाजार तक कानूनी पहुंच मिलेगी, जबकि भारत ने भी ब्रिटेन को लगभग 114 अरब डॉलर के अवसर प्रदान किए हैं।
मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने कहा कि भारत के सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा के लिए इस समझौते में पर्याप्त रक्षोपाय किए गए हैं और राज्यों के स्तर पर सरकारी खरीद के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
जहां तक कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) का सवाल है तो इस पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। एक अधिकारी ने कहा कि यदि भविष्य में ब्रिटेन का कार्बन कर भारतीय निर्यात को प्रभावित करता है, तो भारत आवश्यक समायोजन करेगा।
इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया कि बौद्धिक संपदा अधिकार, श्रम, पर्यावरण और लघु उद्योग से जुड़े प्रावधान भारत की नीतिगत स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करते और इन पर कोई बाध्यकारी विवाद निपटान प्रावधान नहीं है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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