नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा कि भारत में 102 गीगावाट-पी (जीडब्ल्यू पीक) से अधिक की जलक्षेत्र में लगने वाली सौर ऊर्जा क्षमता का आकलन किया गया है और इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही एक प्रतिबद्ध योजना शुरू करेगी।
जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और देश वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा अगुवा के रूप में उभरा है।
उन्होंने भारत की फ्लोटिंग यानी जल क्षेत्र में लगने वाली सौर क्षमता पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि देश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता अब बढ़कर 3,445 गीगावाटपी हो गई है, जिसमें 102 गीगावाटपी से अधिक फ्लोटिंग सौर क्षमता शामिल है।
मंत्री ने कहा कि जलाशय और अन्य जल निकाय अब फ्लोटिंग सौर परियोजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं। सरकार इस क्षमता का सतत और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना तैयार कर रही है।
इस अवसर पर जोशी ने लघु जलविद्युत विकास योजना के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी पेश किया किया। उन्होंने कहा कि इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। यह 2017 के बाद लघु जलविद्युत क्षेत्र में पहला बड़ा नीतिगत हस्तक्षेप है।
उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिये आम नागरिकों की स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ रही है तथा देशभर में नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है।
जोशी के अनुसार, भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 2014 के 81 गीगावाट से बढ़कर 288 गीगावाट हो गई है, जबकि सौर ऊर्जा क्षमता 2.8 गीगावाट से बढ़कर 155 गीगावाट तक पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि घरेलू सौर विनिर्माण क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार हुआ है। देश की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 192 गीगावाट और सौर सेल विनिर्माण क्षमता 30 गीगावाट तक पहुंच चुकी है।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के बीच रक्षा प्रतिष्ठानों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
भाषा अजय अजय रमण
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