भारत-ओमान व्यापार समझौता श्रम पर निर्भर क्षेत्रों के लिए निर्यात के अपार अवसर खोलेगा: विशेषज्ञ

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भारत-ओमान व्यापार समझौता श्रम पर निर्भर क्षेत्रों के लिए निर्यात के अपार अवसर खोलेगा: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 09:43 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 09:43 PM IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते ने वस्त्र, रत्न और आभूषण तथा समुद्री उत्पाद जैसे घरेलू श्रम पर निर्भर और मूल्यवर्धित क्षेत्रों के लिए निर्यात के अपार अवसर खोल दिए हैं। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।

विशेषज्ञों ने कहा कि यह व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवाओं, गतिशीलता संबंधों के लिए भी रूपरेखा तैयार करता है।

यह समझौता एक जून से लागू हो गया है।

‘डेलॉयट इंडिया’ के साझेदार गुलजार डिडवानिया ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर सीईपीए केवल शुल्क कम नहीं करता है, बल्कि यह वस्तुओं, सेवाओं और निवेश के लिए एक टिकाऊ ढांचा तैयार करता है जो मध्यम अवधि में द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि का समर्थन करेगा।’’

उन्होंने कहा कि भारत-ओमान सीईपीए का सबसे रणनीतिक पहलू भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में इसका योगदान है।

भारत, ओमान से कच्चे तेल का शुद्ध आयातक बना हुआ है। ओमान से कच्चे तेल का आयात 2006 में लगभग 0.1 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2022 में बढ़कर 3.6 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। साथ ही, देश ने परिशोधित पेट्रोलियम उत्पादों में एक महत्वपूर्ण निर्यात गलियारा भी विकसित किया, जो 2022 में 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद 2024 में घटकर 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।

सीआईआई की निर्यात संबंधी राष्ट्रीय समिति के सह-प्रमुख एवं पैटन इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय बुधिया ने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

बुधिया ने कहा, ‘‘यह समझौता व्यापार, निवेश, सेवाओं, पेशेवरों की आवाजाही और नियामक सहयोग को समाहित करता है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं।’’

भारत ने ओमान की 98.08 प्रतिशत ‘टैरिफ लाइन’ पर शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच हासिल कर ली है, जो भारत के निर्यात मूल्य के 99.38 प्रतिशत को कवर करती है।

भाषा यासिर रमण

रमण