राजस्थान में खनिजों के ‘अपशिष्ट’ से जरूरी खनिज निकालने की कोशिश, आईआईटी धनबाद के साथ समझौता

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राजस्थान में खनिजों के 'अपशिष्ट' से जरूरी खनिज निकालने की कोशिश, आईआईटी धनबाद के साथ समझौता

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 09:47 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 09:47 PM IST

जयपुर, 10 जून (भाषा) राजस्थान में मार्बल के मलबों के ढेर (अपशिष्ट) के अध्ययन में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे जरूरी खनिजों की गुणवत्तापूर्ण मात्रा के सकारात्मक संकेत मिले हैं। इन खनिज को निकालने की पहल के तहत खान विभाग के राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (आरएसएमईटी) और आईआईटी धनबाद के बीच समझौता किया गया है।

अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। इसके अनुसार हाल ही में राज्य में गुलाबी मार्बल और हरे मार्बल के मलबों के ढेर (डम्प्स) के अध्ययन में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे जरूरी खनिज की गुणवत्तापूर्ण मात्रा के सकारात्मक संकेत मिले हैं। इन खनिज से रक्षा, हरित उर्जा, वैमानिकी उद्योगों की आवश्यकता की पूर्ति हो सकेगी जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ सामरिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर खान विभाग के आरएसएमईटी और आईआईटी धनबाद के बीच राजस्थान के खनिज ‘अपशिष्ट’ के संबंध में समझौता हुआ है। इस समझौते के अनुरूप राज्य में खनिजों के मलबे के विशाल ढेरों, जिनका कोई उपयोग भी नहीं है, में उपलब्ध बेशकीमती जरूरी और रणनीतिक खनिजों का पुनर्चक्रण कर इसे व्यावसायिक उत्पादन में उपयोग करने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। यह अध्ययन अभिनव प्रयास है।

इस समझौते के अंतर्गत खान विभाग द्वारा पायलट परियोजना के रूप में 78 ‘मलबे के ढेर’ (डम्प्स) चिन्हित कर 10-10 ढेर का संकुल बनाया गया। इनमें से उदयपुर जिले और आसपास के संकुल में गुलाबी मार्बल के आठ ढेर और हरे मार्बल (सपैंटिनाइट) के दो ढेर का अध्ययन किया गया । इन ढेर में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम की बड़ी मात्रा पाई गई है। आरंभिक अनुमान के अनुसार यह मात्रा पृथ्वी की ऊपरी परत (क्रस्ट) में इनकी सामान्य उपलब्धता से 25 से 40 गुना अधिक है।

बयान के अनुसार खान विभाग द्वारा चिन्हित 78 ढेर में से शेष 68 ढेर और टेलिंग्स का भी वैज्ञानिक मूल्यांकन आईआईटी आईएसएम धनबाद के सहयोग से किया जा रहा है।

भाषा पृथ्वी रमण

रमण