नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में लगभग 60 दिन का तेल भंडार है और एक महीने की एलपीजी आपूर्ति की व्यवस्था कर ली गई है।
सरकार ने कहा कि पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
सरकार ने कमी की खबरों को ‘जानबूझकर फैलाया गया ‘गलत सूचना अभियान’ बताया, जिसका उद्देश्य लोगों में घबराहट पैदा करना और खरीदारी को बढ़ावा देना है।
पेट्रोल पंप और एलपीजी वितरकों के यहां घबराहट में खरीदारी और लंबी कतारों की खबरों के बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार कच्चे तेल, ईंधन और एलपीजी के भंडार का विवरण जारी किया। इसका मकसद लोगों की घबराहट को दूर करना है।
सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने भी कहा कि पेट्रोल, डीजल या तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति स्थिर बनी हुई है।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि देश भर के सभी पेट्रोल पंप पर पर्याप्त भंडार है और वे सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। पेट्रोल या डीजल की कोई राशनिंग नहीं की जा रही है।
बयान के अनुसार, विशेषकर छोटे शहरों में कुछ पेट्रोल पंप को पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा ‘कैश-एंड-कैरी’ यानी नकद भुगतान प्रणाली लागू किए जाने के बाद ईंधन की आपूर्ति में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
पेट्रोल पंप को दी जाने वाली ऋण राशि को पहले की एक दिन की अनुमति से बढ़ाकर तीन दिन से अधिक करने के लिए कदम उठाए गए हैं, ताकि पंप मालिकों की कार्यशील पूंजी संबंधी समस्याओं के कारण किसी भी पंप पर पेट्रोल और डीजल की कमी न हो।
बयान के अनुसार, ‘‘देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है।’’
मंत्रालय ने कहा कि सभी खुदरा ईंधन दुकानों में पर्याप्त आपूर्ति है और नागरिकों से अपील की कि वे ‘जानबूझकर फैलाई जा रही दुर्भावनापूर्ण, सुनियोजित गलत सूचना अभियान से गुमराह न हों, जिसका उद्देश्य लोगों के बीच अनुचित घबराहट पैदा करना है।’’
ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल (पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनाने में प्रयुक्त कच्चा माल) की आधी आपूर्ति बाधित हुई है, लेकिन देश ने अगले 60 दिन के लिए अन्य स्रोतों से पर्याप्त कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित कर ली है। साथ ही, ईंधन टैंक अनुकूलतम स्तर पर हैं और दो महीने की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हैं।
एलपीजी के संबंध में, मंत्रालय ने कहा कि 8,00,000 टन एलपीजी कार्गो सुरक्षित कर लिए गए हैं और पूरे एक महीने की आपूर्ति की व्यवस्था पक्की कर ली गई है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) ने अलग से दी सूचना में कहा कि उनके पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और किसी भी ईंधन की कोई कमी नहीं है।
पेट्रोलियम उत्पादों के परिशोधन के मामले में दुनिया में चौथे और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भारत, घरेलू ईंधन की उपलब्धता को संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित करता है और 150 से अधिक देशों को परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति करता है।
बयान के अनुसार, ‘‘प्रत्येक भारतीय रिफाइनरी (जो कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में परिवर्तित करती है) 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही है।’’ अगले 60 दिन के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।’’
इसमें कहा गया है कि भारत के पास कुल 74 दिन की कच्चे तेल और ईंधन भंडारण क्षमता है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी, हमारे पास अभी लगभग 60 दिन का वास्तविक भंडार (जिसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और रणनीतिक भंडारण शामिल है) है।’’
बयान के अनुसार, ‘‘वैश्विक स्तर पर चाहे जो भी हो, प्रत्येक भारतीय नागरिक की जरूरतों को पूरा करने लिए लगभग दो महीने की स्थिर आपूर्ति उपलब्ध है।’’
मंत्रालय ने कहा कि दो माह की कच्चे तेल की खरीद पहले ही सुनिश्चित होने की वजह से अगले कुछ माह तक भारत के लिए समस्या नहीं है और ऐसी आपूर्ति की स्थिति में रणनीतिक भंडारण में रखी मात्रा का महत्व गौण हो जाता है।
बयान के अनुसार, ‘‘देश में भंडार के समाप्त या अपर्याप्त होने के किसी भी दावे को पूरी तरह से खारिज कर देना चाहिए।’’
मंत्रालय ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के बावजूद कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। जो भी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है, उसकी भरपाई वैकल्पिक स्रोतों से अधिक आपूर्ति के जरिये हो रही है। भारतीय रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से अधिक पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिन के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है।
सरकार ने चेतावनी दी, ‘‘सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट और कमी या आपातकालीन उपायों के मनगढ़ंत दावे अनावश्यक चिंता पैदा करने के लिए फैलाए जा रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’’
मंत्रालय ने कहा कि देशभर में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप खुले हैं और बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति कर रहे हैं। ‘‘किसी भी पेट्रोल पंप को आपूर्ति सीमित करने के लिए नहीं कहा गया है।’’
दुनिया के कई देश ईंधन की कीमतों में वृद्धि, राशनिंग, ऑड-ईवन वाहन प्रतिबंध और ईंधन स्टेशनों को जबरन बंद करने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कुछ देशों ने ‘राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल’ घोषित किया है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत को ऐसे किसी भी उपाय की आवश्यकता महसूस नहीं होती है। जबकि अन्य देश राशनिंग कर रहे हैं। सही मायने में भारत में आपूर्ति की कोई कमी नहीं है।’’
बयान के अनुसार, ‘चुनिंदा पंप’ पर ‘कुछ छिटपुट घटनाओं’ को घबराहट में खरीदारी बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि ‘‘ये सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो द्वारा फैलाई गई जानबूझकर गलत सूचना के कारण हुई थीं।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘‘इन पंप पर मांग में वृद्धि के बावजूद, सभी उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति की गई और तेल कंपनियों के डिपो आपूर्ति बढ़ाने के लिए रात भर चालू रहे।’’
बयान के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के बावजूद, भारत को आज विश्व भर में अपने 41 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल प्राप्त हो रहा है।
भाषा रमण अजय
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