भारत खाद्य उत्पादन में हासिल कर चुका है आत्मनिर्भरताः सीटीसीआरआई निदेशक

Ads

भारत खाद्य उत्पादन में हासिल कर चुका है आत्मनिर्भरताः सीटीसीआरआई निदेशक

  •  
  • Publish Date - June 13, 2026 / 08:28 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 08:28 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 13 जून (भाषा) उष्णकटिबंधीय कंद वाली फसलों पर शोध करने वाली संस्था सीटीसीआरआई के प्रमुख डॉ. जी. बैजू ने शनिवार को कहा कि भारत ने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और कृषि के क्षेत्र में एक वैश्विक अगुवा के तौर पर उभरा है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-उष्णकटिबंधीय कंद फसल शोध संस्थान (सीटीसीआरआई) के निदेशक डॉ. बैजू ने एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि 1950 के दशक में देश खाद्य आयात पर निर्भर था, लेकिन बाद में उसने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली।

आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, बैजू ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण प्रेरक शक्तियों में से एक बनी हुई है और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 16.3 प्रतिशत का योगदान देती है।

उन्होंने भारतीय कृषि क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि खेती के रकबे में मामूली वृद्धि के बावजूद, अनाज का उत्पादन, जो वर्ष 1950-51 में 5.08 करोड़ टन था, वह वर्ष 2025-26 में बढ़कर 37.65 करोड़ टन हो गया है। इसके अलावा बागवानी उत्पादन भी 37 करोड़ टन के आंकड़े को पार कर गया है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातक देशों में से एक के रूप में उभरा है, जिसमें कृषि निर्यात वर्ष 2001 में 55,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

बैजू ने कहा, ‘‘1.05 लाख करोड़ रुपये के चावल निर्यात के साथ, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक बन गया है।’’

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र ने पिछले सात वर्षों में 4.4 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर कायम रखी है। बार-बार खराब मौसम की स्थिति होने के बावजूद अनाज उत्पादन में लगातार वृद्धि करके जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत की मजबूती को दर्शाता है।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम