भारत लाभों के दोहराव को रोकने के लिए एकीकृत सामाजिक सुरक्षा ढांचा अपनाए : एडीबी

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भारत लाभों के दोहराव को रोकने के लिए एकीकृत सामाजिक सुरक्षा ढांचा अपनाए : एडीबी

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  • Publish Date - April 10, 2026 / 11:54 AM IST,
    Updated On - April 10, 2026 / 11:54 AM IST

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) भारत ‘‘एकीकृत सामाजिक सुरक्षा ढांचा’’ अपनाकर अपनी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकता है। इससे लाभों का दोहराव कम होगा, लक्षित लाभार्थियों तक बेहतर पहुंच बनेगी और दीर्घकालिक वृद्धि के लिए राजकोषीय संसाधन मुक्त हो सकेंगे। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने शुक्रवार को यह सुझाव दिया।

‘एशिया डेवलपमेंट आउटलुक रिपोर्ट’ में भारत से जुड़ी नीतिगत चुनौतियों का उल्लेख करते हुए एडीबी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की कई योजनाओं में समान लाभार्थी समूहों शामिल हैं और पात्रता, लाभ स्तर या वितरण व्यवस्था को लेकर इनके बीच समन्वय सीमित है।

‘‘लाभों का दोहराव’’ का मतलब एक ही व्यक्ति या परिवार का अलग-अलग सरकारी योजनाओं से समान प्रकार के लाभ लेने से है जैसे किसी व्यक्ति का राज्य सरकार की पेंशन योजना और केंद्र की पेंशन योजना दोनों से लाभ लेना।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और दिव्यांगता ‘कवरेज’ को जोड़ने वाला एकीकृत ढांचा जिसमें अंशदायी योजनाएं भी शामिल हों.. यह लाभों के दोहराव को कम करेगा और लोगों की विभिन्न प्रकार की समस्याओं से बेहतर तरीके से निपटेगा।’’

इसके अनुसार यह व्यवस्था राज्यों के स्तर पर भिन्न परिस्थितियों के अनुरूप दृष्टिकोण अपनाने में भी मदद करेगी क्योंकि सामाजिक सुरक्षा की जरूरतें जनसांख्यिकीय संरचना, रोजगार ढांचे और राजकोषीय क्षमता के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

मनीला स्थित इस बहुपक्षीय वित्तीय संस्था ने कहा कि इस तरह का दृष्टिकोण सरकारों को लाभ हस्तांतरण की सुरक्षा भूमिका को बनाए रखने या मजबूत करने की अनुमति देगा। साथ ही कुल राजकोषीय लागत को नियंत्रित रखते हुए बुनियादी ढांचा एवं मानव पूंजी निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगा जो दीर्घकालिक वृद्धि के लिए जरूरी हैं।

एडीबी ने कहा, ‘‘ एक एकीकृत सामाजिक सुरक्षा ढांचा सरकार के सभी स्तरों पर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में व्याप्त विखंडन को दूर करेगा।’’

सब्सिडी हस्तांतरण के संबंध में एडीबी ने कहा कि सत्यापित लाभार्थी पहचान से जुड़े प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) का दायरा बढ़ाकर राजकोषीय दक्षता में सुधार किया जा सकता है। इससे लाभों का दोहराव कम होगा।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ उपभोग आधारित सब्सिडी से हटकर निवेश आधारित सहायता की ओर बढ़ना, जैसे मुफ्त बिजली के बजाय छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को प्रोत्साहन एक ओर राजकोषीय बोझ कम कर सकता है और दूसरी ओर परिवारों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत कर सकता है।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा