भारत को 100 गीगावाट परमाणु क्षमता पाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदार, दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत

भारत को 100 गीगावाट परमाणु क्षमता पाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदार, दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत

भारत को 100 गीगावाट परमाणु क्षमता पाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदार, दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत
Modified Date: September 11, 2026 / 09:16 pm IST
Published Date: September 11, 2026 9:16 pm IST

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) के प्रबंध निदेशक रोहित ऋषि ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी और दीर्घकालिक पूंजी तक पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

मुंबई में ‘अनलॉकिंग फ्यूचर ऑफ न्यूक्लियर पावर: इनेबलिंग इन्वेस्टमेंट, फाइनेंसिंग एंड बैंकेबिलिटी’ विषय पर आयोजित ‘नेशनल पॉलिसी डायलॉग’ में ऋषि ने कहा कि रूस और अमेरिका के बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, जबकि फ्रांस में लगभग 60 प्रतिशत है। इसके मुकाबले भारत के बिजली मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब तीन प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत को 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी और दीर्घकालिक पूंजी तक पहुंच की आवश्यकता होगी।”

आईआईएफसीएल ने शुक्रवार को बयान में कहा कि कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए जरूरी वित्तीय, नियामकीय और संस्थागत परिस्थितियों पर चर्चा की गई। साथ ही, ऐसी परियोजनाएं विकसित करने पर जोर दिया गया, जिन्हें दीर्घकालिक वित्तपोषण उपलब्ध कराया जा सके।

कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा विभाग, वित्त मंत्रालय, सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों, बैंकों, परमाणु क्षेत्र की कंपनियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

भाषा यासिर पाण्डेय

पाण्डेय


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