नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) भारत अपने विशाल डेवलपर आधार और मजबूत डिजिटल ढांचे के बल पर वैश्विक कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र के अगले चरण के विस्तार का नेतृत्व करने के लिए सक्षम स्थिति में है। माइक्रोसॉफ्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही।
इसका एक आधार उद्यमों द्वारा एआई का तेजी से उपयोग किया जाना भी है।
माइक्रोसॉफ्ट में कोरएआई के कार्यकारी उपाध्यक्ष जय पारेख ने मंगलवार को एक पोस्ट में कहा कि भारत में डेवलपर्स वैश्विक स्तर पर ओपन सोर्स में दूसरा सबसे बड़ा योगदान देने वाले है। उन्होंने एआई से जुड़ी परियोजनाओं में 75 लाख से अधिक योगदान दिए हैं।
भारत में निर्मित हाइपरस्विच, ईआरपीनेक्स्ट, टूलजेट और ब्रूनो जैसी ओपन-सोर्स परियोजनाओं का उपयोग अब दुनिया भर के डेवलपर कर रहे हैं।
पारेख ने कहा, ‘‘एआई का अगला चरण इस बात से तय नहीं होगा कि कौन सबसे अच्छे मॉडल बनाता है, बल्कि इस बात से तय होगा कि कौन उन्हें भरोसे, गति तथा वास्तविक दुनिया पर प्रभाव डालते हुए बड़े पैमाने पर तैनात कर सकता है। भारत इस बदलाव के लिए विशिष्ट रूप से तैयार है।’’
पारेख ने देश में उद्यमों द्वारा एआई को तेजी से अपनाने पर प्रकाश डालते हुए डेलॉयट के 2026 एंटरप्राइज एआई सर्वेक्षण का हवाला दिया। यह सर्वेक्षण बड़े पैमाने पर एआई की स्वीकार्यता के मामले में भारत को 15 देशों में से पहले स्थान पर रखता है।
भाषा यासिर अजय
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