यूरोपीय संघ के कार्बन कर के लिए भारत ने तैयारी की तेज, समिति का गठन

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यूरोपीय संघ के कार्बन कर के लिए भारत ने तैयारी की तेज, समिति का गठन

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  • Publish Date - September 15, 2026 / 09:01 PM IST,
    Updated On - September 15, 2026 / 09:01 PM IST

नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) भारत ने निर्यातकों को यूरोपीय संघ की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था (सीबीएएम) के नियमों का पालन कराने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने इसके लिए प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों, नियामकों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों वाली एक समिति गठित की है।

वाणिज्य मंत्रालय ने यूरोपीय संघ के सीबीएएम के लिए निर्यात तैयारी समिति का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। इसमें प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों, नियामकों और उद्योग संगठनों को शामिल किया गया है।

वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सत्यापनकर्ता इस महीने से यूरोपीय संघ के सीबीएएम यानी कार्बन कर पंजीकरण प्रणाली तक पहुंच बना सकते हैं। हालांकि, घरेलू निर्यातकों के लिए रिटर्न दाखिल करना सितंबर, 2027 से अनिवार्य होगा।

जैन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस साल सितंबर से सत्यापनकर्ताओं के माध्यम से सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन वास्तविक रिटर्न सितंबर, 2027 तक दाखिल करने होंगे।’’

सीबीएएम यूरोपीय संघ की ओर से विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान कार्बन उत्सर्जन करने वाली वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कार्बन कर है। इसके दायरे में उर्वरक, लोहा-इस्पात, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इसके तहत यूरोपीय संघ चुनिंदा आयातित वस्तुओं पर कार्बन शुल्क लगाएगा। इसकी गणना यूरोपीय संघ की उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (ईटीएस) के मूल्य के आधार पर होगी और निर्यातक देश में पहले से चुकाए गए कार्बन शुल्क का समायोजन किया जाएगा।

जैन ने कहा, ‘‘इस संदर्भ में सरकार निर्यातकों को इस बारे में जागरूक कर रही है कि वे अपने उत्पादों में शामिल कार्बन उत्सर्जन का सत्यापन कैसे कराएं और रिटर्न दाखिल करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम और कारोबारी कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। साथ ही, राष्ट्रीय मान्यता निकाय और भारतीय सत्यापनकर्ताओं को यूरोपीय संघ से मान्यता दिलाने के मुद्दे पर भी वहां के अधिकारियों से बातचीत की गई है।’’

जैन ने बताया कि भारत के कुछ सत्यापनकर्ताओं ने पहले ही यूरोपीय संघ की संबंधित एजेंसियों के पास आवेदन कर दिया है।

उन्होंने उम्मीद जताई, ‘‘कुछ भारतीय सत्यापनकर्ताओं को जल्द ही मान्यता मिल जाएगी, जिससे देश में ही सत्यापन एजेंसियां उपलब्ध हो सकेंगी।’’

ये सत्यापनकर्ता निर्यातकों की ओर से दी गई कार्बन उत्सर्जन संबंधी जानकारी की सटीकता और यूरोपीय संघ के सीबीएएम नियमों के अनुरूप होने की जांच करेंगे।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त को पत्र लिखकर प्रमाणन निकायों के लिए राष्ट्रीय मान्यता बोर्ड (एनएबीसीबी) को सीबीएएम सत्यापनकर्ताओं के लिए मान्यता निकाय के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है।

जैन ने कहा कि यूरोप के साथ इस मुद्दे पर बातचीत जारी है और निर्यातकों के साथ भी चर्चा की जा रही है, ताकि नियमों का अनुपालन आसान बनाया जा सके।

ब्रिटेन के सीबीएएम के बारे में जैन ने कहा कि यह एक जनवरी, 2027 से लागू होगा और ब्रिटेन ने भारत के मान्यता निकाय एनएबीसीबी को मान्यता दे दी है। इस निकाय की ओर से जारी प्रमाणन को ब्रिटेन स्वीकार करेगा।

भाषा रमण अजय

अजय