भारत प्रस्तावित शुल्क पर अगले सप्ताह यूएसटीआर के समक्ष रखेगा अपना पक्ष

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भारत प्रस्तावित शुल्क पर अगले सप्ताह यूएसटीआर के समक्ष रखेगा अपना पक्ष

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  • Publish Date - July 3, 2026 / 09:00 PM IST,
    Updated On - July 3, 2026 / 09:00 PM IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, तीन जुलाई (भाषा) भारत अगले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के समक्ष प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ अपना पक्ष रखेगा और ‘बंधुआ मजदूरी’ से जुड़े निष्कर्षों को कानूनी रूप से दोषपूर्ण बताते हुए चुनौती देगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ उद्योग संगठनों एपीडा, फिक्की, सीआईआई और एक्मा के प्रतिनिधि आठ जुलाई को होने वाली सार्वजनिक सुनवाई में यूएसटीआर के प्रस्ताव के खिलाफ भारत का पक्ष रखेंगे।

भारत पहले ही लिखित प्रस्तुति में कह चुका है कि यूएसटीआर के निष्कर्ष देश की मजबूत घरेलू कानूनी व्यवस्था को नजरअंदाज करते हैं, जिसमें बंधुआ मजदूरी को रोकने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध, संस्थागत व्यवस्था और नीतिगत उपाय शामिल हैं।

पिछले महीने यूएसटीआर ने ‘व्यापार अधिनियम, 1974’ की धारा 301 के तहत भारत से आयातित वस्तुओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। इसी तरह की कार्रवाई अन्य देशों के खिलाफ भी प्रस्तावित की गई है।

धारा 301 को अमेरिका का एक शक्तिशाली एकतरफा व्यापारिक साधन माना जाता है, जिसके तहत वह विदेशी व्यापारिक व्यवहार की जांच कर शुल्क या अन्य प्रतिबंध लगा सकता है।

प्रस्तावित शुल्कों के संदर्भ में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने अपने जवाब में कहा है कि भारत की नीतिगत रूपरेखा ‘व्यापार अधिनियम 1974’ की धारा 301(बी) के तहत ‘अतार्किक’ या ‘भेदभावपूर्ण’ नहीं मानी जा सकती।

सीआईआई ने यह भी कहा कि भारत में संवैधानिक और वैधानिक ढांचा ऐसा है, जो कंपनियों को बंधुआ मजदूरी की अनुमति नहीं देता है।

फिक्की ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि अमेरिकी बाजार को आपूर्ति करने वाली भारतीय निर्यात शृंखलाएं स्थापित अनुपालन मानकों के तहत काम करती हैं, जिनमें अनुसरण-योग्यता, आपूर्तिकर्ता जांच, स्वतंत्र ऑडिट और जिम्मेदार खरीद व्यवस्था शामिल हैं।

वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एक्मा) ने कहा है कि भारत का वाहन कलपुर्जा विनिर्माण क्षेत्र मुख्यतः संगठित, प्रौद्योगिकी-आधारित और श्रम एवं अनुपालन मानकों के अधीन है, लिहाजा इसमें बंधुआ मजदूरी का इस्तेमाल न तो अंतर्निहित है और न ही स्वाभाविक।

इसके अलावा, अखिल भारतीय मसाला निर्यातक मंच और अखिल भारतीय सब्जी डिहाइड्रेटेड विनिर्माता विकास संघ ने भी इस मुद्दे पर यूएसटीआर को अपनी लिखित टिप्पणियां सौंपी हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय