नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (सीईपीए) के तहत सोने के आयात पर रियायती शुल्क कोटा (टीआरक्यू) का इस्तेमाल अब तक सीमित ही रहा है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
इस व्यापार समझौते के तहत सोने के आयात पर लागू सीमा शुल्क से एक प्रतिशत कम दर पर आयात की सुविधा दी गई है लेकिन इसका उपयोग अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में कुल सोना आयात 795 टन और 2024-25 में 757 टन रहा। इनमें टीआरक्यू के तहत आयात की हिस्सेदारी क्रमशः लगभग पांच प्रतिशत (40 टन) और 18 प्रतिशत (करीब 140 टन) ही रही।
वित्त वर्ष 2025-26 में इस व्यवस्था के तहत 8.58 टन का कोटा तय किया गया था जबकि पिछले वित्त वर्ष में देश का कुल स्वर्ण आयात 721 टन रहा।
अधिकारी ने कहा, “इस टीआरक्यू का वास्तविक उपयोग अबतक सीमित रहा है और हाल के समय में तो यह बेहद मामूली स्तर पर रहा है।”
सरकार ने एक दिन पहले सोने पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। हालांकि, जीएसटी को मिलाकर प्रभावी शुल्क 9.2 प्रतिशत से बढ़कर 18.4 प्रतिशत हो गया है।
व्यापार के मोर्चे पर वित्त वर्ष 2025-26 में यूएई को भारत का निर्यात करीब दो प्रतिशत बढ़कर 37.36 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 0.77 प्रतिशत बढ़कर 63.89 अरब डॉलर रहा।
दोनों देश ने 2030 तक गैर-तेल व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय